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चार साल बाद उन्हीं तारीखों में बरसा अलविदा मानसून

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After four years it rained goodbye monsoon on the same dates
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देव शर्मा
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करनाल। 22, 23 और 24 सितंबर ये वो तारीखें हैं, जब 2019 में भी मौसम ने कहर बरपाया था। चार साल पहले मानसून ने फिर वापसी की है। बारिश 250 एमएम के पार जा सकती है। इसके लिए किसानों को आगाह किया गया है।
मौसम व कृषि के जानकार मानते हैं कि मानसून चार साल बाद दोहराव करती है। बिना कोई तिथि गंवाए, मानसून ने निर्धारित तिथियों में अपना प्रभाव दिखाया है। उपनिदेशक (कृषि) डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि कृषि जानकार ये बात जानते हैं कि चार साल के बाद मौसम फिर वापसी करता। रिकॉर्ड बताता है कि 22, 23 और 24 सितंबर 2019 को भी भारी बारिश हुई थी। उस समय करीब 250 एमएम बारिश हुई थी। इस बार भी इतनी ही बारिश की संभावना है। बारिश 200 एमएम के करीब पहुंच चुकी है। दो दिनों की बारिश में फसलों को नुकसान तो हुआ है, लेकिन वास्तविक स्थिति तभी पता लग पाएगी, जब इसका सर्वे कराया जाएगा या फिर किसान बताएंगे कि कितना नुकसान हुआ है। लेकिन यह बारिश रुकने के बाद ही संभव है। विभागीय कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वह लगातार इस पर नजर बनाए रखें। नुकसान का आंकलन किया जाएगा।
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इधर, एनडीआरआई की जिला कृषि मौसम सेवा के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि जो फसल कटी है, या तो फ्लावरिंग की स्थिति में है, उसे बारिश से नुकसान हो रहा है। जो फसल तेज हवाओं के कारण गिर गई है, उसे भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वह खेतों में भरे पानी को निकाल दें। अरहर की फसल भी इन दिनों फ्लावरिंग की स्थिति में है, बारिश से उसका फूल झड़ सकता है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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