यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 40वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि एक बार गणधर गौतम स्वामी ने भगवान महावीर स्वामी से पूछा कि प्रभु आज हर व्यक्ति परेशान व दुखी है। आखिर क्यों? हर प्राणी सुख को पाना चाहता है लेकिन बहुत प्रयास करने के बाद भी सुख नहीं मिलता। इसका क्या कारण है?
प्रभु ने कहा कि इसका कारण है तृष्णा, इच्छा। जिस व्यक्ति की इच्छाएं अधिक हैं, वह व्यक्ति सब कुछ होते हुए भी चैन से नहीं रह पाता। व्यक्ति की जरूरत तो पूरी हो जाती है लेकिन इच्छाएं किसी की भी पूरी नहीं होती। जब भी इच्छाएं पूरी नहीं होती तो व्यक्ति दुखी व परेशान होता है। प्रभु ने कहा कि संतोषी नर सदा सुखी। जो व्यक्ति संतुष्ट होता है, वह गरीबी में भी सुख से रह सकता है। इसलिए व्यक्ति को इच्छाओं का त्याग कर संतुष्ट रहना चाहिए।
जो मिला है, उसमें खुश रहना चाहिए। संतोष एक ऐसी भावना है, जो जीवन की परिस्थितियों में संतुष्ट रहने की शक्ति प्रदान करती है। यह जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद करती है। साथ ही शांति व आनंद की ओर ले जाती है। संतोष जीवन की परिस्थितियों में संतुष्ट रहने की शक्ति प्रदान करता है। संतोष जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने में मदद करता है। संतोष जीवन की समस्याओं का समाधान निकालने में मदद करता है। संतोष प्राप्त करने के लिए अपेक्षाओं को कम करना चाहिए। संतोष प्राप्त करने के लिए जीवन की परिस्थितियों को स्वीकार करना चाहिए। जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। संवाद