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ट्रामा सेंटर में इलाज के दौरान एक नाबालिग की मौत

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मां द्वारा स्कूल जाने के लिए कहने पर 15 वर्षीय बेटी ने जहरीला पदार्थ निगल लिया। परिजन बेटी को लेकर तुरंत घरौंडा स्थित स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां से उसे करनाल सिविल अस्पताल रेफर किया गया। परिजन बिटिया को लेकर करनाल अस्पताल तो पहुंचे मगर इलाज के इंतजार में किशोरी यहां बेहाल तड़पती रही। ट्रामा सेंटर में जब तक इलाज शुरू हुआ, तो बहुत देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान ही किशोरी ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि बेटी का इलाज शुरू करने में देरी की गई। इस वजह से बेटी बच नहीं सकी। दूसरी ओर, सिविल अस्पताल के पीएमओ ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
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घरौंडा क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली किशोरी ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा थी। बुधवार सुबह उसकी माता ने उसे स्कूल जाने के लिए कहा था मगर बेटी स्कूल नहीं जाना चाहती थी। मां ने जब दोबारा उसे स्कूल जाने के लिए तैयार होने को कहा तो किशोरी नाराज हो गई और वहां से चली गई। थोड़ी ही देर बाद बेटी ने परिजनों से उल्टी और पेट खराब होने की बात कही। बाद में मालूम हुआ कि किशोरी ने अनाज को कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा (जहरीला पदार्थ) निगल ली है।
घबराए परिजन तुरंत उसे स्थानीय हेल्थ सेंटर ले गए और वहां से रेफर करने के बाद करनाल नागरिक अस्पताल पहुंचे। आरोप लगाते हुए परिजनों ने बताया कि वे बेटी को लेकर दोपहर साढ़े बारह बजे ट्रामा सेंटर में पहुंच गए थे मगर यहां डेढ़ बजे उनकी पर्ची बनाई गई। डेढ़ घंटे तक भी किसी डाक्टर ने किशोरी की सुध नहीं ली। वह इस दौरान दर्द से कराहती रही। उसके बाद जब उसका इलाज शुरू हुआ तो बेटी ने पानी मांगा मगर उसे पानी नहीं दिया गया। थोड़ी देर बाद किशोरी की मौत हो गई।
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इस पर परिजनों ने कड़ा विरोध जाहिर किया और पुलिस को मौके पर बुलवा लिया। परिजनों का आरोप है कि समय पर उनकी बेटी को इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद बेटी का शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस का कहना है कि परिजनों की तरफ से लिखित शिकायत मिलने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन
ट्रामा सेंटर में तुरंत इलाज न मिले, संभव नहीं : पीएमओ
ऐसा संभव नहीं है कि ट्रामा सेंटर में मरीज पहुंच जाए और उसे तुरंत इलाज न दिया जाए। डॉक्टर व अन्य स्टाफ यहां सदैव ड्यूटी पर रहते हैं। फिर भी यदि परिजन लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं तो इस मामले की जांच करवाई जाएगी। यह देखा जाएगा कि परिजन मरीज को लेकर ट्रामा सेंटर कब पहुंचे और इलाज कब शुरू हुआ। रही बात पानी न देने की तो जहरीला पदार्थ निगलने के मामले में जब मरीज को इलाज के दौरान ड्रिप लगाई जाती है तो उसे पानी नहीं दिया जाता।
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- पीयूष शर्मा, पीएमओ, नागरिक अस्पताल
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