करनाल। चकबंदी पीड़ित पांच गांवों के किसान डीसी से मिले, जल्दी जमीन वापस दिलाने की मांग की। किसानों ने कहा अब कार्यवाही में देरी क्यों? खरीदी हुई जमीन जल्दी वापस दिलाई जाए, ताकि समय रहते किसान अपनी जमीन पर जीरी की फसल लगा सकें। गौरतलब है कि चकबंदी पीड़ित किसान, 2013 से अपनी खरीदी हुई जमीन भूमाफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। 2013 से शुरू हुए इस आंदोलन में पीड़ित किसानों ने सैकड़ों बार धरने प्रदर्शन, अर्धनग्न प्रदर्शन यहां तक रेल ट्रैक भी जाम किया था, लेकिन 2013 से अब तक किसानों को कुछ नहीं मिला। सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही थी। किसानों को इस आंदोलन के दौरान सैकड़ों पीड़ित किसानों, महिलाओं और बच्चों को भी जेल जाना पड़ा था। अमृतपुर कलां व अमृतपुर खुर्द के के लोगों का 2013 से अब तक प्रशासन व चकबंदी अधिकारियों पर कब्जा था। पिछले शुक्रवार को रोहतक कमिश्नर की कोर्ट ने चकबंदी पीड़ित किसानों के समर्थन में फैसला दिया था। किसान नकली राणा, राजबल राणा, अकल सिंह, महीपाल, सुनील चोपड़ा, परमवीर आर्य, नरेन्द्र मराठा ने डीसी से मांग की है कि अब इस मामले में देरी नहीं होनी चाहिए। डीसी ने आश्वासन दिया कि इस कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी। इस मौके पर चकबंदी संयोंजक प्रदीप कालरम, सुनील चोपड़ा, नरेन्द्र मराठा, श्रीराम मराठा, पाला राम, राम कुमार, कृष्ण, सतपाल, ईश्वर, मैनपाल राणा कालरम, जयपाल शर्मा, रूहला सिंह अमृतपुर खुर्द आदि मौजूद थे।