माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कर्ण नगरी में भैया दूज पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। इस दिन हरियाणा हज कमेटी के पूर्व प्रवक्ता खुर्शीद आलम ने अपने घर पर 62 हिंदू बहनों से तिलक लगवाया। इनमें किशोरियों से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक शामिल थीं। इन सभी को खुर्शीद ने
न्योता देकर अपने घर बुलाया था। इस दौरान सभी बहनों का मुंह मीठा करवाते हुए उन्हें उपहार भी दिए गए। खुर्शीद का मानना है कि ऐसा कर उन्होंने समाज में भाईचारे की एक मिसाल पेश की है और उन लोगों को जवाब दिया है जो सोशल मीडिया पर उनके द्वारा दिए गए भैया दूज के संदेश पर टिप्पणी कर रहे थे।
यूं तो खुर्शीद आलम की कुछ हिंदू बहनें हर रक्षाबंधन पर उन्हें राखी बांधती हैं, भैया दूज खिलाने भी आती हैं लेकिन इनकी संख्या आठ से 10 तक रहती थी, इस बार सोशल मीडिया पर जब लोगों ने भैया दूज की बधाइयां देनी शुरू की तो खुर्शीद आलम पर कुछ लोगों ने टिप्पणी कर दी कि यूं ही सूखी बधाई देने का क्या फायदा है, बहन बनाओ, उनके घर जाओ या उन्हें बुलाओ, उनका मान सम्मान करो तभी त्योहार की वास्तविक शुभकामनाएं होंगी। लोगों ने जवाबी टिप्पणी भी कर दी कि हम भी देखेंगे कि आप कितनी बहनों का सम्मान करेंगे। इसके बाद खुर्शीद आलम ने अपने फ्रेंड सर्किल में मैसेज दिया कि वह अपने आवास झंझाड़ी गांव में भैया दूज पर बहनों का स्वागत करेंगे। खुर्शीद आलम ने बताया कि उनके मैसेज पर ये उम्मीद तो थी कि करीब 15 से 20 बहनें पहुंच सकती हैं लेकिन 62 बहनें पहुंच जाएंगी, इसकी उम्मीद नहीं थी। इनमें कई महिलाएं, अधिकांश छात्राएं शामिल थीं, जो भैया दूज का थाल सजाकर अपने धर्म के भाई को भैया दूज खिलाने पहुंचीं। खास बात ये रही कि खुर्शीद आलम का पूरा घर बहनों के मान सम्मान में जुट गया। सभी बहनों को बैठाकर विधिवत तरीके से रोली चंदन का टीका लगवाकर भैया दूज की मिठाई खिलाई और उन्हें आशीर्वाद दिया। साथ ही गिफ्ट के साथ विदाई दी। खुर्शीद आलम ने कहा कि आज उन्हें जितनी खुशी मिली, उतनी जीवन में कभी नहीं मिली।