माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। विधानसभा चुनाव में रोडवेज के कर्मचारियों की ड्यूटी लगने और पुलिस व अर्ध सैनिक बलों के लिए बसों को आरक्षित करने से जिले की परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। जिला प्रशासन की ओर से कुल 24 बसों को फोर्स के लिए आरक्षित किया गया है। ऐसे में बसों के 46 फेरे घट गए हैं। अब मतगणना के बाद ही बस सेवा दुरुस्त होने की उम्मीद है।
सबसे ज्यादा दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर चलने वाली बसों को हटाया गया है। इसके अलावा ग्रामीण व लोकल मार्गों से भी बसें हटाई गई हैं। अधिकारियों का दावा है कि जिन मार्गों से करनाल रोडवेज की बसों को हटाकर चुनाव ड्यूटी में आरक्षित किया गया है, इन मार्गों पर अन्य डिपो की बसें चलती हैं, ऐसे में लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं आएगी।
उल्लेखनीय है कि 25 सितंबर के बाद से पुलिस और अर्ध सैनिक बल को लाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से रोडवेज बसों को लगाया गया था। इन बसों में अब 14 बसें अलग-अलग थाना क्षेत्र में ड्यूटी पर हैं। अन्य 10 बसों को विधानसभा क्षेत्रों में फोर्स लाने और ले जाने के लिए रिजर्व रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, आठ अक्तूबर की मतगणना के बाद बाहर से आई फोर्स के रवाना होने के बाद ही ये बसें सामान्य मार्गों पर दौड़ेंगी।
उत्तर प्रदेश के आठ जिलों से आई फोर्स
करनाल रोडवेज की बसें हरियाणा के दूसरे जिलों में भी गई हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के आठ जिलों से भी बसें पुलिस व सुरक्षा बलों बसों को लाने और उन्हें जिले में अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाने के लिए लगाया गया है। ये बसें यूपी से हापुड़, मुजफरनगर, सहारनपुर, इटावा सहित अन्य जिलों से आए जवानों के पास हैं। अब इन जवानों की जहां पर ड्यूटी है, वहां बसें साथ हैं। इसके अलावा जिस बस से जवान आए थे, उन्हें उसी बस से वापस भी भेजा जाएगा।
चुनाव में सुरक्षा बलों व पुलिस के लिए 24 बसों को आरक्षित रखा गया है। जवानों को लाने-ले जाने के लिए ये बसें ड्यूटी पर हैं। इससे दिल्ली-चंडीगढ़ के अलावा उन ग्रामीण व स्थानीय मार्गों की बस सेवा प्रभावित है, जहां पर सवारियां कम हैं। जहां की सवारियां होती हैं, उस मार्ग पर दूसरी बस को चलाया जाता है। - कुलदीप सिंह, जीएम रोडवेज।