अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। तकनीकी और वैज्ञानिक विषयों का पठन-पाठन केवल अंग्रेजी में हो सकता हैं, यह एक भ्रम है। हिंदी में वैज्ञानिक विषयों पर कार्य नहीं हो सकता, यह भी भ्रामक बात है। इन दोनों ही भ्रमों से भारत के बुद्धिजीवियों के मनों को मुक्त किए जाने की दरकार है। यह विचार हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष व निदेशक प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह चौहान ने बहुतकनीकी पाठ्यक्रम की पुस्तकों के हिंदी प्रकाशनार्थ आयोजित बैठक में व्यक्त किए। करनाल स्थित विकास सदन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रो. वीरेंद्र चौहान ने कहा कि मातृभाषा में मुद्रित पाठ्य पुस्तकें ही विद्यार्थियों को वास्तव में सक्षम और ज्ञानवान बना सकती है। यह तथ्य अब विश्व विदित है कि मातृभाषा में ही मस्तिष्क बेहतर या यूं कह लीजिए कि सर्वश्रेष्ठ परिणाम देता है। इजरायल, चीन, जापान, फ्रांस आदि राष्ट्रों का उदाहरण देते हुए प्रो चौहान ने कहा कि इन सभी राष्ट्रों ने अपनी अपनी भाषा में ज्ञान विज्ञान का अध्ययन कर प्रगति की ऊंचाइयों छुई है इन देशों ने कभी भी अंग्रेजी पर वैसे निर्भरता नहीं दिखाई जैसे कि भारत ने आजादी के बाद और अंग्रेजों के जाने के बाद दिखाई गई। उन्होंने कहा कि ऐसा उस वक्त के नेतृत्व की अंग्रेजीदां मानसिकता के कारण हुआ। उन्होंने कहा कि इस दास मानसिकता से देश को मुक्ति दिलाने का समय आ गया है।एमकेजी पॉलिटेक्निक, जाटल के प्रधानाचार्य ने हिंदी में पुस्तकों की उपलब्धता को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा की अंग्रेजी की पुस्तकों को भले ही पूरा ना हटाया जाए तो भी हिंदी की पाठ्य पुस्तकों की समांतर उपलब्धता पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों को बहुत लाभान्वित करने वाली है और हरियाणा ग्रंथ अकादमी का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। गाजियाबाद से पधारे डॉ. पुष्पेंद्र शर्मा ने कहा के हिंदी पाठ्य पुस्तकों के प्रकाशन के साथ-साथ हमें इस मानसिकता पर भी प्रहार करना होगा कि तकनीकी पुस्तकें हिंदी में नहीं लिखी जा सकती और पॉलिटेक्निक या अन्य तकनीकी क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग के लिए भरकस प्रयास करने होंगे। तकनीकी पुस्तकों के हिंदी लेखक समिति के समन्वयक डॉ. आरसी जैन ने विभिन्न लेखकों द्वारा किए गए अभी तक विभिन्न विषयों से संबंधित कार्य का ब्योरा प्रस्तुत किया व अन्य पॉलीटेक्निक संस्थानों से उपस्थित अध्यापक, प्राचार्य व प्रधानाचार्य को प्रेरित किया कि वह भी लेखन कार्य से जुड़े और हरियाणा ग्रंथ अकादमी के इस महत्वपूर्ण कार्य में सहायक हों। इस अवसर पर प्रचार्य डॉ आरपी सैनी, जुझार सिंह, देशपाल गर्ग, अभिषेक चौहान व सरोज बुकल आदि अन्य विद्वान भी उपस्थित रहे।