करनाल। शुक्रवार को आर्य समाज दयालपुरा करनाल में श्रावणी पर्व एव वेदप्रचार सप्ताह के उपलक्ष्य में चतुर्वेद शतकीय यज्ञ संपन्न कराया गया। बिजनौर उ.प्र. से पधारे पं. नरेश दत्त आर्य ने अपने भजनों के माध्यम से सभागार में उपस्थित श्रोताओं को लाभांवित किया। उन्होंने कहा मनुष्य को परमात्मा के निज नाम ‘ओम’ का स्मरण करना चाहिए। युजुर्वेद के मंत्र ‘ओम क्रतो स्मर’ के माध्यम से कहा कि हे कर्मशील जीव तू ‘ओम’ का स्मरण कर यह वाक्य ईश्वरीय ज्ञान वेद में निहित है। इस लिए सब मनुष्यों को ओउम् का स्मरण करना चाहिए। गुरुकुल कम्हेड़ा साहरनपुर से पधारे आचार्य विरेंद्र शास्त्री ने अपने ज्ञानामृत की वर्षा करते हुए कहा कि चारों वेद जिस पद की बार-बार वर्णन करते हैं। इसकी इच्छा प्राप्ति के लिए लोग ब्रह्मचर्य जैसे कठोर व्रत को धारण करते हैं। वह पद ‘ओम’ ही है। ये संपूर्ण ब्रह्मांड ओम में ही समाहित है। अ से ईश्वर, उ से जीव, म से प्रकृति की बड़ी ही सरल भाषा में व्याख्या करते हुए ओम के स्वरूप का दर्शाया। उन्होंने नासा के वैज्ञानिकों का उद्धरण प्रस्तुत कर कहा कि वैज्ञानिक तो आज इस खोज पर रीझ रहे हैं कि उन्होंने पता लगा लिया कि सूर्य से ओम की ध्वनियां निकल रही हैं, लेकिन हमारे ऋषि मुनियों ने इसकी खोज बहुत पहले ही कर दी थी। इस आयोजन पर प्रधान सत्येंद्र मोहन कुमार, मंत्री रमेश आर्य, चौ. लाजपत राय, शमशेर कुमार शास्त्री, बलजीत आर्य, विजय आर्य, धर्मचंद आर्य, जगदीश मधोक, सुंदर सिंह, डॉ. रहतु लाल, शशी आर्या, नव किरण भाटिया, बसंता देवी, उमा कौशिक आदि सैकड़ों की संख्या में आर्यजन उपस्थित थे।