मधुबन पुलिस कांपलेक्स से करीब 1800 जवान भेजे गए थे, लेकिन अभी तक मात्र 50 जवानों ने ही अपनी हाजिरी दर्ज कराई है। गौरतलब है कि जाट आरक्षण के उग्र होने के बाद शुक्रवार को मधुबन पुलिस कांपलेक्स से एचएपी (हरियाणा आर्म्ड पुलिस) की 2 बटालियन और हरियाणा पुलिस ट्रेनिंग की एक बटालियन रोहतक के लिए रवाना की गई थी। पुलिस कर्मचारियों का कहना है कि जैसे ही पुलिस की गाड़ियां रोहतक के बोहर बलियाना और पाक्समा के पास पहुंची तो ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और पुलिस कर्मचारियों को गाड़ियों से नीचे उतारकर बसों को आग के हवाले कर दिया। ऐसे में पुलिस के जवान किसी प्रकार अपनी जान बचाकर भागे। रविवार दोपहर को किसी प्रकार रोहतक से पैदल चलकर करनाल पहुंचे पुलिस के जवान ने बताया कि जैसे ही वे गांव पाकस्मा पहुंचे तो हजारों की भीड़ ने उन्हें रोक लिया और बसों में आग लगाना शुरू कर दिया। आनन-फानन में वे जान बचा कर भागे। जवान ने बताया कि वे रातभर आसपास के खेतों में छीपे रहे और सुबह छीपकर भागे। पैदल चलते-चलते वे किसी प्रकार पानीपत से होते हुए करनाल पहुंचे। उधर, करीब 1800 जवानों ने इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई। हालांकि, सोमवार को माहौल शांत हो गया, लेकिन बावजूद इसके अभी तक मधुबन कांपलेक्स से भेजे गए जवानों ने अपनी वापसी की हाजिरी नहीं लगवाई है। करीब 50 जवानों ने ही वापसी दर्ज कराई है। आशंका जताई जा रही है कि जाम के कारण वे कहीं रास्तों में फंसे हैं। हालांकि, कांपलेक्स के अधिकारी लगातार उनको फोन करके उनका हाल चाल जानने की कोशिश कर रहे हैं। इस बारे में मधुबन पुलिस कांपलेक्स के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मधुबन पुलिस कांपलेक्स से करीब 1800 जवान भेजे गए थे। इनमें प्रत्येक बटालियन में 600-600 जवान शामिल थे। बता दें कि मधुबन में पुलिस की दूसरी, चौथी और पांचवीं पुलिस बटालियन है। उन्होंने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि एक दो दिन में जवान वापस आ जाएंगे।