अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। उत्तम औषधालय के प्रांगण में चल रही कथा की अध्यक्षता छठे दिन सोमवार को वैद्य देवेंद्र बत्तरा, दर्शना बत्तरा एवं मानव बत्तरा ने हवन यज्ञ करके पावन ज्योत वैद्य प्रज्जवलित की। स्वामी सुख सागर महाराज के पधारने पर वैद्य देवेंद्र बत्तरा, सुभाष गुरेजा, सुभाष वधावन, भारत भूषण ने माल्यार्पण करके स्वागत किया। उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि हमें मात-पिता, गुरु, शास्त्र, भगवान इन पांचों का सम्मान करना चाहिए और उनके आदेश का पालन करना चाहिए, जिससे हमें हित में सुख अनुभव होता है। भगवान ने मनुष्य के लिए भी समय सारिणी बना रखी है। इसमें 7 घंटे सोने के, 8 घंटे कमाने के, 6 घंटे खाने के, तीन घंटे साधन, समुदाय और सत्संग करने के लिए हैं। मनुष्य को शास्त्र की विधि के अनुसार ही काम करना चाहिए। आजकल भक्त पूछते हैं कि महाराज हमें चैन नहीं है। चैन इन पांचों की मानोगे तो मिलेगा, नहीं मानोगे तो नहीं मिलेगा। मनुष्य को समर्थ, शक्ति, सम्पत्ति को दुरपयोग नहीं करना चाहिए। फिर उन्होंने भजन के माध्यम से भक्तों को आशीर्वाद दिया। कथा करते हुए पंडित चेतन देव शर्मा ने कहा एक भारी आकार वाले भयंकर नेत्र वाले पुरुष को देख कर इन्द्र ने पूछा कि तू कौन है और शिव कहां हैं। कई बार पूछने पर भी उसने उत्तर नहीं दिया। इंद्र ने क्रोध में आकर अपना वज्र उसके कंठ पर मारा जिससे कंठ नीला हो गया और वज्र भस्म हो गया। उसकी आंख से ऐसी प्रचंड अग्रि निकली मानो इंद्र सहित सबको भस्म कर देगी। इंद्र ने शिवजी की स्तुति की, इस प्रकार नारद जी कहने लगे की स्तुति सुनने पर महादेव ने त्रिलोकी को जला देने वाली अग्रि को शांत कर दिया और उसे समुद्र में फेंक दिया। समुद्र से एक बालक के रोने की आवाज आई। ब्रह्मा ने समुद्र से पूछा की यह बालक किसका है। समुद्र ने कहा यह मेरा पुत्र है गंगा से उत्पन्न हुआ है इस का जातकर्म कराए, ब्रह्मा ने जैसे ही बालक को उठाया उसने ब्रह्मा की दाढ़ी को जोर से खींचा, जिससे ब्रह्मा जी के आंखों से जल निकला है इसका नाम जलंधर होगा, परंतु यह शिव के अतिरिक्त किसी और से नहीं मारा जाएगा, क्योंकि यह शिव के अंश से उत्पन्न हुआ है। पंडित ऐमनागोड ने श्री मन नारायण नारायण की धुन भक्तों से लगवाई। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वैद्य देवेंद्र बत्तरा, दर्शना बत्तरा, मानव बत्तरा, सुभाष गुरेजा, सुभाष वधावन, भारत भूषण, प्रदीप कुमार, गौरव, मोनिक, हर्ष, रविन्द्र खुराना, संजय, राजिन्द्र, राकेश गौतम, राजेश चावला, रमेश पाल, रमा लाठर, अशोक पोपली, राज ग्रोवर, रामप्रकाश, राजिन्द्र मोहन शर्मा, डॉ. दीनानाथ, भूपेन्द्र पटरेजा, रामलाल, सोना देवी, कांता शर्मा, श्रवण बठला, वासुदेव अलग, हर्ष अलग, सन्नी मुंजाल, दीपक आहुजा, दुर्गा आहुजा, स. मोहर सिंह, ओम प्रकाश, रामु यादव, देवी बाई, बबीता आदि ने कथा सुनकर पुण्यलाभ कमाया।