कैथल। जिला परिषद के अध्यक्ष की कुर्सी पर शुरू हुए राजनीतिक घमासान पर शुक्रवार को विराम लग गया। दरअसल, अध्यक्ष को कुर्सी से हटाने के लिए मतदान की प्रक्रिया संपन्न हो गई, लेकिन इसका परिणाम जारी नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि चुनाव परिणाम जारी होने के बाद जिला परिषद में राजनीतिक सरगर्मियां फिर तेज होंगी। माना जा रहा है कि जिला परिषद में पिछले एक महीने से चल रही फिल्म का अंत तो बाकी है, लेकिन अभी शुरुआत में एकतरफा हुए मतदान ने इसका ट्रेलर जरूर दिखा दिया है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार के समय जिला परिषद कैथल में भी सब कुछ ठीकठाक चल रहा था। इसके बाद जैसे ही दोनों पार्टियों का गठबंधन टूटा तो भाजपा की ओर से जिला पंचायत के अध्यक्ष की कुर्सी छीनने प्रयास भी शुरू हो गया परंतु इस दौरान लोकसभा चुनाव की घोषणा के कारण आचार संहिता लगने के कारण सदन की बैठक नहीं हो पाई थी। ऐसे में लोकसभा चुनाव संपन्न होने के कुछ समय के बाद बैठक गत 25 जून को बुलाई गई, लेकिन जिप की सीईओ व एडीसी सी जया श्रद्धा के अचानक अवकाश पर चले जाने के कारण इसे अचानक रद्द करना पड़ा।
इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। सदन की बैठक रद़्द होने के बाद भाजपा समर्थित पार्षदों ने 12 जुलाई को डीसी प्रशांत पंवार से मुलाकात की और उसी दिन डीसी ने भी 19 जुलाई की तिथि अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मतदान प्रक्रिया आयोजित करने के आदेश जारी किए।
इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सदन की बैठक से पहले ही जजपा समर्थित अध्यक्ष दीपक मलिक उर्फ दीप बालू ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से परिणाम रोकने को लेकर जारी किए आदेशों को लेकर जानकारी दी परंतु चुनाव रद्द नहीं हुआ और जिला प्रशासन ने सभी जिला पार्षदों को मतदान के लिए आमंत्रित किया।
अब इस चुनाव का परिणाम आना शेष है। परिणाम आने के बाद ही आगे फैसला होगा कि यह कुर्सी जजपा की रहेगी या फिर इस पर भाजपा का कब्जा होगा। संवाद