युवाओं को आलस्य त्यागकर समाजसेवा का संकल्प लेना चाहिए : संत छविराम
सीवन। युवा समाजसेवी नित्यम के आवास पर आयोजित धार्मिक चर्चा में संत छविराम दास ने कहा कि जो इंसान दूसरों की मदद करता है, वह कभी भगवान की कृपा से वंचित नहीं रह सकता। ईश्वर के दरबार में धन-दौलत नहीं, बल्कि दया और सेवा का खजाना काम आता है। उन्होंने कहा कि मंदिरों की घंटियां तभी सार्थक हैं जब हमारे दिल की घंटियां करुणा और संवेदना से बजें।
संत छविराम दास ने युवाओं से विशेष आग्रह किया कि वे आलस्य छोड़कर समाजसेवा को अपने जीवन का संकल्प बनाएं। उन्होंने कहा कि परोपकार ही वह दीपक है, जो इंसान को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। मंदिर में चढ़ाए फूल तो मुरझा जाते हैं, लेकिन जरूरतमंद की मदद में खिले फूल कभी नहीं सूखते।
संत ने कहा कि भगवान को सोने-चांदी के दीपकों की आवश्यकता नहीं, उन्हें तो इंसान के दिल में जलाई गई सेवा-दीपिका चाहिए। यदि कोई भूखा व्यक्ति हमारे घर से निराश लौट जाए तो हमारी पूजा अधूरी रह जाती है। जो दूसरों का भला करता है, उसकी राह में स्वयं भगवान आशीर्वाद बनकर खड़े हो जाते हैं।
धार्मिक चर्चा के दौरान वातावरण भाव और भक्ति से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने संत के चरणों में नमन कर उनके उपदेशों को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। अंत में संत छविराम दास ने कहा – भलाई करो, सेवा करो, यही सबसे बड़ी पूजा है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना और आशीर्वाद के साथ हुआ।
इस अवसर पर प्रवेश, शिल्पा, शालिनी, सोनिया, चित्रा, ममता, अदिति, सुमन, रिंपी, निशिका व अंजू बाला सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।