बारिश व तेज हवा के चलते गिरी धान की फसल।
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एक ही दिन में धान की तैयार फसल की बालियां सफेद हो जाने से किसान सदमे में हैं। किसान चंद्र चौशाला, किताब सिंह, पप्पू सुरताखेडा आदि ने बताया कि उनके खेतों में खड़ी बासमती धान की फसल तैयार होने के कगार पर थी। कल सुबह से ही धान की 1121 व बासमती किस्मों की बालियां सफेद होना शुरू हो गई। किसान के समझ में नही आ रहा की फफूंदनाशकों के स्प्रे करने के बावजूद भी बालियां सफेद कैसे हो गई। सतीश राणा ने कहा कि सफेद बालियों में दाना ही नही बना तथा किसान का पीला सोना बर्बाद हो कर रह गया। उन्होंने बताया कि धान की किस्म 1121 व परमल में शीथ ब्लाइट रोग के निदान से अभी किसान बाहर आए नही थे कि फसल को गर्दन तोड़ नामक बीमारी ने घेर लिया जिसके कारण धान की फसल बर्बाद होने के कगार पर है। किसानों का कहना है कि पूरे क्षेत्र में अचानक से आई बीमारी के कारण खेतों में स्प्रे करने वाले मजदूरों की भी कमी पड़ गई है तथा किसानों को मंहगे दामों पर स्प्रे करवाना पड़ रहा है। इस बारे कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डा.जितेंद्र अहलावत से बात की गई तो उन्होंने बताया कि धान की फसल बालियां ले चुकी थी तथा उन में दाना डलने को तैयार था कि दिन व रात के तापमान में परिवर्तन आ गया। रात्रि में आर्द्रता की मात्रा अधिक व दिन का तापमान अधिक होने से नैक ब्लास्ट के वायरस को पनपने का मौका मिल गया। उन्होंने बताया की इस समय जो बासमती धान की बालियां सफेद निकल रही हैं उसका कारण नैक ब्लास्ट नही बल्कि नोड़ ब्लास्ट है। विशेषज्ञों की सलाह लेकर बीमारी के लिए दवाओं का छिड़काव करें।