संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को अमर उजाला की ओर से अपराजिता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें जिला नागरिक अस्पताल से मनोचिकित्सा नर्सिंग अधिकारी प्रीति ने स्कूल की विभिन्न कक्षाओं की छात्राओं को मानसिक तनाव के कारण और उससे बचाव के तरीके बताए। साथ ही छात्राओं को किशोरावस्था में होने वाली परेशानियों के कारण मानसिक तनाव से बचाव तरीकों भी जानकारी दी।
नर्सिंग अधिकारी प्रीति ने बताया कि मानसिक तनाव होने का बड़ा कारण हमारा गलत खानपान व अनावश्यक दबाव है। अगर हम अपने खानपान पर ध्यान दें और किसी भी प्रकार की अनावश्यक गतिविधियों को अनदेखा करें तो मानसिक तनाव से बचा जा सकता है। खानपान ही हमारे स्वास्थ्य का आधार है। अगर यही सही नहीं होगा तो अच्छे शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य की उम्मीद नहीं की जा सकती है। सही खानपान के अभाव में हमारे शरीर में कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याएं पैदा हो जाती हैं। भले ही हमें शुरूआत में महसूस न हो, लेकिन आयु बढ़ने के साथ उनके परिणाम सामने आने लगते हैं। उन्होंने सलाह दी कि स्वस्थ रहने के लिए खाने में हरी सब्जियां, फल, दूध, दालें व अन्य पोषक तत्वों को शामिल करें। डाइट प्लान बनाकर समयानुसार कुछ न कुछ जरूर खाते रहें। शरीर स्वस्थ होगा तो मन भी स्वस्थ रहेगा।
प्रीति ने बताया कि तनाव मुख्यत: दो तरह का होता है, जिसे यू और डी की श्रेणी में विभक्त किया जाता है। यू श्रेणी का तनाव सकारात्मकता के कारण होता है, जिसमें हम कुछ न कुछ सीखने या फिर अच्छा करने के लिए तनाव लेते हैं, लेकिन शरीर व मन के लिए यह भी अच्छा नहीं होता है। दूसरी ओर डी श्रेणी का तनाव अनावश्यक गतिविधियों के कारण होता है।
उन्होंने बताया कि अगर इससे बचना है तो सबसे पहले चाहिए कि हम शुरुआत में ही इसे समाप्त करने का प्रयास करें। तनाव के कारणों के बारे में परिवार के किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं। वह आपका पिता, मां, भाई, बहन या दोस्त भी हो सकता है। बात उनके साथ साझा करने से किसी प्रकार की समस्या का हल निकलने के आसार अधिक रहते हैं और तनाव से बचा जा सकता है।
विद्यार्थी जीवन में सीखना भी तनाव को दूर करने का बड़ा जरिया है। अगर स्कूल में दिए गए कार्य को लेकर किसी प्रकार की चिंता रहती है तो उसे दूर करने के लिए स्कूल के कार्य को घर पर दोहराएं। स्कूल में छह घंटे पढ़ते हैं तो घर पर भी कम से कम तीन घंटे जरूर पढ़ें। आप जितना पढ़ेंगे, उतना ही अधिक सीखेंगे और सही जवाब देने में सक्षम होंगे। इससे विद्यार्थी तनाव से बच सकता है।
इस दौरान कक्षा 12वीं की छात्रा मीनाक्षी ने सवान किया कि सही खानपान के दृष्टिगत क्या नाश्ते के बाद दोपहर को भोजन करना जरूरी है? इसके जवाब में प्रीति ने बताया कि शरीर को दैनिक कार्यों के लिए जितनी कैलोरी की जरूरत होती है, वह अच्छे भोजन से ही मिलती है। ऐसे में जितनी इच्छा हो उतना जरूरी खाएं। वहीं 10वीं कक्षा की छात्रा रेनू ने
सवाल किया कि मनोचिकित्सक कैसे बन सकते हैं?
इसके जवाब में उन्होंने बताया कि इसके लिए सबसे पहले एमबीबीएस करें और उसके बाद आगामी कोर्स करें। स्कूल की प्रधानाचार्या ममता कौशिक ने धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा। उन्होंने महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए अमर उजाला व अस्पताल टीम का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर स्कूल स्टाफ से पिंकी, सुशीला व सोनू मौजूद रहीं।