संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। श्री जाहर वीर गोगा पीर धार्मिक स्थल पर आयोजित छडि़यों के वार्षिक मेला हजारों श्रद्धालु जुटे। इस मौके पर पहलवान ने दंगल में दमखम दिखाया। इस बार महिला खिलाड़ियों ने भी दंगल में अपना दम दिखाया। उत्साह से महिलाएं लोकगीत गाती हुई धार्मिक स्थल पर पहुंचीं।
मेले के दौरान धार्मिक स्थल से लेकर, रेलवे रोड, श्री कपिल मुनि धाम मार्ग, हैफड मार्ग और आसपास का आवासीय क्षेत्र मेला परिसर में तबदील रहा। प्रबंध समिति ने न केवल गोगा माड़ी स्थल को विशेष तौर पर सजाया हुआ था, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसका भी विशेष प्रबंध किया हुआ था।
मेले की विशेष बात यह है कि इस दिन मजार पर लाई जाने वाली छड़ियों की विशेष तौर से पूजा अर्चना की जाती है। छड़ी के पूजा स्थल पर पहुंचने के साथ ही सबसे पहले गुरु गोरख नाथ जी की पूजा अर्चना की जाती है जिसके पश्चात छड़ी का दूसरे स्थलों पर शीश नवा श्रद्धालुओं के लिए पूजा अर्चना
परंपरा का निर्वहन करते हुए गोगा पीर पर चढऩे वाली पहली छड़ी का पूरे विधि विधान से जुगनू जी भगत के पवित्र स्थल पर हवन के साथ पूजन हुआ। प्रबंध समिति के प्रधान सुरेंद्र राणा ने बताया की हर साल भादो माह की शुक्ल पक्ष सप्तमी को कलायत में छडि़यों का मेला लगता है। जाहरवीर गोगा को जन्म से अजेय माना गया है। उनकी कथा नाथ संप्रदाय के युग में वर्णित है।
उन्होंने सभी धर्मों के सम्मान की रक्षा के लिए फिरोजशाह द्वितीय से भी युद्ध किया। घर से चलकर गोगा ने राजस्थान के जोहर नामक स्थान पर समाधि ले ली थी। तभी से उनकी स्मृति में भादो मास की नवमी को एक विशाल मेला लगता है।
गुरु गोरखनाथ ने सांपों की सेना अधर्म की समाप्ति के लिए दी थी। इसीलिए उनके पूजा स्थल पर सांपों के चित्र बनाए जाते है। मेले में हर वर्ष कुश्तियों का भी आयोजन होता है। हर साल मेले में केवल पुरुष खिलाड़ी ही दमखम दिखाते रहे हैं। महिला खिलाड़ियों ने भी दमखम दिखाया।