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Kaithal News: मंदिरों, घरों में कंजकों का पूजन

Sat, 12 Oct 2024 04:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल, सीवन, राजौंद, कलायत। जिले में शुक्रवार को दुर्गाष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर पिछले आठ दिन से उपवास रख रहे श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन कर अपना उपवास खोला। इस मौके पर शहर की बड़ी देवी और छोटी देवी मंदिर में सुबह से ही मां के श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में माथा टेका और मनकोमनाएं मांगी।

शहर में कन्या पूजन को लेकर भी श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिला। इस कड़ी में कस्बा सीवन में भी श्री दुर्गा अष्टमी का पर्व बड़े ही श्रद्धा से मनाया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं की पूजा की व प्रसाद खिलाकर उपहार आदि दिए। अधिकतर श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन के लिए हलवा, काला चना, पुरी व नारियल का प्रसाद वितरित किया।
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श्रद्धालु संगीत बंसल, अभिषेक मेहता, सुरेश सरदाना, अशोक गोयल, ऊषा चौधरी, डाॅ. आभा, शालिनी, अदिति ने कहा कि मां दुर्गा बड़ी ही दयालु है व अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाली है। जो भक्त सच्चे दिल से मां दुर्गा की पूजा करना है उसे मनवांछित फल अवश्य मिलता है। श्रद्धालुओं ने बताया कि कन्या पूजन का महत्व और इसकी परंपरा नवरात्रों के दौरान विशेष रूप से निभाई जाती है। खासकर अष्टमी या नवमी के दिन। इस दिन भक्त कन्याओं को देवी के रूप में पूजते हैं, उन्हें भोजन कराते हैं और उनका सम्मान करते हैं।

ऐसा माना जाता है कि कन्याओं में देवी दुर्गा का निवास होता है, और उनकी सेवा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में भक्तों ने छोटी कन्याओं का सम्मानपूर्वक पूजन करके उन्हें प्रसाद अर्पित किया, जिसमें हलवा, काले चने, पूड़ी और नारियल प्रमुख होते हैं। कहा कि कन्या पूजन के बाद भक्तों ने व्रत का समापन किया, जिसे देवी की उपासना का अंतिम चरण माना जाता है। यह व्रत के दौरान की गई तपस्या और पूजा को पूर्णता देने का प्रतीक है।

राजौंद में भी तीन अक्तूबर से शुरू हुए पावन नवरात्र का पर्व शुक्रवार को कन्या पूजन के साथ संपन्न हो गया। पिछले आठ दिन से उपवास रखकर मां दुर्गा के पावन चरणों में पूजा-अर्चना करने वाले साधकों को कन्या पूजन के लिए कन्याओं को ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक-एक कंजक को कई-कई जगह मां दुर्गा का रूप धारण कर प्रसाद ग्रहण करना पड़ा।

प्राचीन काल से मान्यता चली आ रही है कि जो साधक नवरात्र का व्रत कर अष्टमी के दिन कन्याओं की पूजा कर उन्हें श्रद्धा पूर्वक भोजन करवाते हैं। उन पर मां भगवती अपना पूर्ण हाथ रखती है व उनकी पूजा-अर्चना व उपवास को सफल बनाती है। उधर, दुर्गा मंदिर में महिला संकीर्तन मंडली ने कीर्तन किया। जिसमें भारी संख्या में महिलाओं ने पहुंचकर मां की महिमा का गुणगान किया।

कलायत क्षेत्र मेंं शुक्रवार को मां दुर्गा अष्टमी पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। मंदिरों के साथ-साथ घरों में मां दुर्गा अष्टमी पर्व पर पूजा-अर्चना की गई। साथ ही कन्या पूजन परंपरा का निर्वहन किया गया।

इस संबंध में विशाल शांडिल्य ने बताया कि यह पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का प्रतीक है। मां दुर्गा अष्टमी को विशेष रूप से नवरात्र के आठवें दिन मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में दुर्गा अष्टमी के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर भव्य आयोजन किए जाते हैं।
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इस दौरान देवी की आरती, भजन और कीर्तन का आयोजन होता है। इस दिन विशेष रूप से कन्या पूजन का महत्व है। जिसमें नन्ही कन्याओं को आमंत्रित कर उन्हें भोजन करवा कर उनका सम्मान किया जाता है। दुर्गा अष्टमी पर कंजका पूजन के लिए कन्याओं की भारी कमी देखने को मिली। छोटी-छोटी कंजकाें को लिए श्रद्धालु सुबह से ही परेशान रहे। जो छोटी कंजकाें की टोली थी उनके लिए लोग अपनी बारी की प्रतीक्षा में रहे। कंजकाें का जहां दिल किया और थोड़ा सा प्रसाद पाकर आगे कर रास्ता पकड़ा।सास-बहू ने उठाई कोविड मरीजों को खाना पहुंचा ा पहुंचाने की जिम्मेदारी
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