पूंडरी। पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा की आराधना से आता है जीवन में मंगल आता है। शारदीय नवरात्रि में माता पृथ्वी पर वास करती है। इनका पूजन प्राय: सभी घर में किया जाता है। शांडिल्य ने बताया की साथ ही इस बार नवरात्रि पर ग्रहों का बहुत ही शुभ संयोग बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि नवरात्रि पर इस बार बुधादित्य राजयोग, भद्र राजयोग, धन योग, त्रिग्रह योग और गजेसरी राजयोग का शुभ संयोग रहने वाला है। मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र, लाल चुनरी, अशोक या आम की पत्तियाँ, चावल, दुर्गा सप्तशती की किताब, लाल कलावा, गंगा जल, चंदन, नारियल, कपूर, जौ के बीच, मिट्टी का बर्तन, गुलाल, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची इत्यादि अर्पित करें। अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं। आखिरी दिन दुर्गा की पूजा के बाद घट विसर्जन करें मां की आरती गाए, उन्हें फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा का आगमन सोमवार के दिन हो रहा है, इसलिए इस बार उनका वाहन हाथी होगा। मान्यता है कि हाथी पर आगमन होने से सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। संवाद