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Kaithal News: सीवन में महिला मोर्चा ने अर्पित की श्रद्धांजिल

Tue, 24 Jun 2025 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सीवन। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रभक्त एवं शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर भाजपा सीवन मंडल और महिला मोर्चा ने अलग-अलग श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। इनमें पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

मुख्य कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष एवं मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन संजय सैनी ने की। कार्यक्रम में प्रवीण रसूलपुर, सुभाष भगत, बलराज सैनी, हरिकेश शर्मा, महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष कृष्णा देवी, राजबाला सैनी, राज रानी, बलजीत सैनी सहित कई कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उन्हें युगपुरुष बताते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
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भाजपा महिला मोर्चा सीवन मंडल की ओर से मंडल अध्यक्ष कृष्णा कश्यप के नेतृत्व में डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।

कृष्णा कश्यप ने कहा कि जिस अनुच्छेद 370 के खिलाफ डॉ. मुखर्जी संघर्ष कर रहे थे, उसका अंत आज देश देख चुका है। कार्यक्रम में महिला मोर्चा की कई कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
डॉ. मुखर्जी ने दिया था- एक देश में दो विधान दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे का नारा
कलायत। पिंजूपुरा स्थित ग्राम सचिवालय में सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा देकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा मंडल अध्यक्ष राजीव राजपूत ने शिरकत की। इस अवसर पर उनके साथ शिव कुमार सैनी, सरपंच राजेंद्र सिंह, रमेश कुमार, जगदीश प्रधान, बिंदर मोर, जय करण, वीरेंद्र राणा, राजेश बैद, नरसी गर्ग सहित संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

राजीव राजपूत ने डॉ. मुखर्जी के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक महान राष्ट्रवादी नेता, शिक्षाविद और चिंतक थे, जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

इस दौरान डॉ. मुखर्जी की जीवनी पर आधारित वक्तव्य प्रस्तुत किए गए। राजपूत ने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर देश में एक मजबूत वैचारिक राजनीति की नींव रखी। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के विरोध में संघर्ष करते हुए उन्होंने 23 जून 1953 को जेल में अपने प्राण त्यागे।
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कार्यक्रम में बच्चों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिसने माहौल को देशभक्ति की भावना से भर दिया। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। संवाद
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