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बेटियों को बचाने के लिए जान भी जोखिम में डाली

Wed, 08 Mar 2017 12:32 AM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
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डा. नीलम कक्कड़ के नेतृत्व में हो चुकी हैं दो साल में 34 रेड - फोटो : फाइल फोटो
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ मुहिम में लिंगानुपात नियंत्रित करने के लिए ऐसी मुहिम चली कि कैथल की डिप्टी सिविल सर्जन डा. नीलम कक्कड़ जान की परवाह किए बिना इस मिशन में जुट गई। यूपी में गन्ने के घने खेतों में जान की बाजी लगाकर लिंग जांच करने वाली मशीन पकड़ने का मामला हो या फिर गांव बीरबांगड़ा, करोड़ा में बंधक बनाए जाने की घटनाएं, सभी खतरों को दरकिनार करते हुए वे आज भी बेटा होने के नाम पर समाज व कानून को ठगने वाले लोगों को उनकी असली जगह पहुंचाने की दिशा में काम कर रही हैं।
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अमर उजाला से बातचीत में सिविल सर्जन डा. नीलम कक्कड़ ने बताया कि वर्ष 2015 में सरकार द्वारा शुरू किए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत छापेमार कार्रवाई की गई। जिसमें उन्हें इन टीमों का इंचार्ज बनाया गया। शुरू में काफी दिक्कतें आईं। लेकिन जब प्रशासन व आला अधिकारियों का सहयोग मिलता गया तो कारवां बढ़ता गया। अब तक कुल 34 सफल रेड की हैं। जिसमें से 20 पीएनडीटी एक्ट के तो 34 एमटीपी व ड्रग्स कंट्रोल एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार करवाया है। इनमें से अब तक पीएनडीटी एक्ट में 2 को तो एमटीपी एक्ट में 1 को सजा भी हो चुकी है।

चार बार डाली जान जोखिम में
डा. कक्कड़ बताती हैं कि यूपी में घने गन्ने के खेतों में की गई रेड सबसे खतरनाक थी। उस समय वहां अंधेरा हो गया था और उन्हें बंधक बनाए जाने जैसी स्थिति हो गई थी। वहां से जान बचाकर मुश्किल से निकले। इसके बाद गांव कैलरम में आरोपी हमारे डिकोय मरीज को ही लेकर फरार हो गया था। 2 घंटे बाद मरीज मुश्किल से मिली। इसके बाद गांव करोड़ा में उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। अब पिछले सप्ताह बीरबांगड़ा में भी उन्हें बंधक बना लिया गया। पंजाब में स्वास्थ्य विभाग ने बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया। वे अल्ट्रासाउंड मशीन से लिंग जांच, बेटा होने की दवा देने एवं बिना अनुमति के दवा बेचने वालों के खिलाफ रेड कर रही हैं।
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दूसरे राज्यों में रेड करना ज्यादा जोखिम भरा
अब तक कैथल स्वास्थ्य विभाग की टीम डॉ. कक्कड़ के नेतृत्व में यूपी में 2, पंजाब में 3, जींद व कुरुक्षेत्र में 1-1, बाकी कैथल में रेड की हैं।

सख्ती का ही नतीजा है कि आज सुधरने लगा है लिंगानुपात
विभाग की सख्ती का नतीजा है कि दो साल पहले कैथल का लिंगानुपात 1000 लड़कों पर 897 था। आज यह औसतन 976 पहुंच गया है। वहीं पूरे फरवरी माह का कैथल जिले का लिंगानुपात 996 आया है।
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