संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिधि में आने वाले कलायत क्षेत्र मेंं अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उपलक्ष्य में कार्यक्रमों की गूंज रहेगी। इस दौरान हरियाणवी लोक गीतों के जरिये महिलाएं आयोजन में रंग भरने की तैयारी में जुटी हुई हैं।
कलायत शहर में श्री कपिल मुनि तीर्थ, मटौर गांव श्री तीर्थ, मुकुटेश्वरी तीर्थ, खटवांगेश्वर तीर्थ और बालू गांव का बालखिल्य तीर्थ पर प्रशासन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन संबंधित प्रबंध कमेटियों एवं आम लोगों के सहयोग से करेगा। भारत देश की गौरवशाली
संस्कृति से जुड़े गीता जयंती महोत्सव को सफल बनाने के लिए एसडीएम सत्यवान सिंह मान निरंतर तीर्थों का दौरा करते हुए लोगों से बैठकें कर रहे हैं।
इस कड़ी में प्रशासनिक अधिकारी ने श्री तीर्थ पर महंत सुमेरदास के साथ कार्यक्रम को लेकर व्यापक चर्चा की। इस दौरान सुमेरदास ने बताया कि श्री तीर्थ का इतिहास महाभारत, वामन पुराण और भागवत पुराण से जुड़ा है। तीर्थ को चर्म रोगों से मुक्ति का स्थान माना जाता है। इस स्थल पर भगवान शालिग्राम की दुर्लभ धरोहर है। इसके साथ ही तीर्थ परिसर में कुरुक्षेत्र धरोहर की तरह कई प्राचीन मूर्तियां हैं। तीर्थ के पानी को औषधीय माना जाता है।
इसी तरह गांव मटौर के श्री तीर्थ, माता मुुकुटेश्वरी तीर्थ और खडालवा स्थित प्राचीन खटवांगेश्वर तीर्थ की महिमा निराली है। ये तीर्थ गांव के साथ-साथ देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र हैं। गांव मटौर का संबंध महर्षि मारकंडेय की माता मुकटेश्वरी से रहा है। गांव में मुकटेश्वरी धाम के नाम से मंदिर व सरोवर है। श्री तीर्थ पर भगवान शालिग्राम के दर्शन करके भगवान श्री हरि व माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। जयंती उत्सव को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी उत्साह है।
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