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Kaithal News: खनौदा में महिलाओं ने लगाया भेदभाव का आरोप

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ढांड। खनौदा में आशा वर्कर और आंगनवाड़ी पदों को लेकर महिलाओं में भारी रोष है। महिलाओं का आरोप है कि आशा वर्कर के चारों पद सामान्य वर्ग से भरे गए हैं। जिससे एससी और बीसी वर्ग की योग्य महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। इसके विरोध में महिलाओं ने सरकार विरोधी नारेबाजी का रोग जिताया। हम अपना अधिकार मांगते हैं किसी से भीख नहीं नारो के साथ महिलाओं ने अपना विरोध दर्ज कराया और न्याय की मांग की। ममता रानी, रबनम, मीना, किताबो, मीना, सुमन, ममता, सोनिया, राजो, दीक्षा, शिक्षा, केलो, किताबो, ज्योति, माफी नहीं बताया कि उनके गांव में एक आशा वर्कर पद के लिए करीब 35 महिलाओं ने आवेदन किया था और कौशल परीक्षा और इंटरव्यू भी दिया था लेकिन योग्य होते हुए भी एससी-बीसी की महिलाओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
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बुजुर्ग महिलाओं क्या कहना है कि हमारी बेटियां और बहुएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं, फिर भी उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। अगर शीघ्र ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे कैथल डीसी से शिकायत करेंगी और जरूरत पड़ी तो बड़े स्तर पर आंदोलन भी किया जाएगा। इस अवसर पर रजनी, कविता, संतोष, सुदेश, कमलेश, प्रवीण, ज्योति, कुसुम, प्रवीण, मीना, डिंपल, महिंद्रा आदि मौजूद रहे।
जिला आशा कॉर्डिनेटर रामफल कश्यप ने बताया कि सभी आशा वर्कर की आवेदकों का कम्युनिकेशन स्किल टेस्ट होता है और इसके लिए जातीय तौर पर कोई रिजर्वेशन नहीं होती। एक हजार की आबादी पर एक आशा वर्कर की नियुक्ति होती है और उसकी वेकेंसी स्टेट हैड क्वार्टर की ओर से निकाली जाती है।
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