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दस दिन में पहुंचेगा मालक सिंह का पार्थिव शरीर गांव दाबनखेड़ी

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गुहला-चीका। कनाडा में उच्च शिक्षा के लिए बेटे को भेजते समय गांव दाबनखेड़ी निवासी सिनंद्र पाल सिंह व पलविंद्र कौर ने सुनहरे सपने देखे थे। सपने भी क्यों ना देखते, बेटा कनाडा में जाकर पढ़ाई करने लगा था। लेकिन होनी को कुछ ओर ही मंजूर था। उनके बेटे 19 वर्षीय मालक सिंह की कनाडा में 25 जुलाई को उस समय मौत हो गई, जब वह काम पर जा रहा था। दोस्तों के साथ कंपनी की जिस गाड़ी में मालक सिंह सवार था, वह गाड़ी एक पहाड़ी पर से पलट गई। इस हादसे में मालक सिंह की मौके पर ही मौत हो गई और अन्य तीन युवकों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कहीं जा रही है। शुक्रवार को मालक सिंह की मौत का समाचार जैसे ही उसके परिजनों को मिला तो उन पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। जवान बेटे की मौत का समाचार सुनते ही मां पलविंद्र कौर दहाड़े मार कर रोने लगी। मां को बेटे की मौत की खबर पर जैसे यकीन नहीं आ रहा था और वह बार बार कहती है कि कोई कह दे कि मेरे पुत्र की मौत की खबर झूठी है, वह वापिस मेरे पास जरूर आएगा। भाई की मौत की खबर सुनकर दोनों बड़ी बहनें भी सन्न रह गई। बहनों का भी रो रोकर बुरा हाल है। बेटे की मौत से पिता सिंनद्र सिंह व छोटा भाई भी सदमे में है और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि जिस देश को सबसे सुरक्षित मानकर बेहतर भविष्य के लिए बेटे को वहां भेजा था उसी देश ने उनके बेटे को लील लिया है। मालक सिंह की मौत की ाबर सुनते ही दाबन खेड़ी व आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है और ग्रामीण सिंनद्र पाल सिंह के घर पहुंच उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। कनेडा में सडक़ हादसे में मारे गए मालक सिंह के परिवार के सदस्य गुरप्रीत सिंह ने बताया कि मालक सिंह ने डीएवी स्कूल चीका से नॉन मेडिकल से बाहरवीं कक्षा पास की थी जिसके बाद आईलाइटस में सात बैंड हासिल किए थे। मालिक सिंह का पिछले वर्ष सितंबर में कनेडा का वीजा लगा था जिसके बाद वह कनेडा में टरोंटो के ब्रह्मटन शहर में रह कर अपनी पढ़ाई पूरी रहा था। गुरप्रीत सिंह ने बताया कि मालक सिंह पढ़ाई के बाद काम भी करता था। उन्हें सूचना मिली है कि मालक सिंह की सडक़ पर गाड़ी पलटने से मौत हो गई है। गुरप्रीत सिंह ने बताया कि मालक सिंह की मौत के बाद से वे कनाडा में रह रहे कुछ भारतीय मूल के लोगों के संपर्क में है और मृतक मालक सिंह के शव को जल्द से जल्द वापिस भारत लाने के प्रयास कर रहे है। गुरप्रीत सिंह ने बताया कि शव के भारत आने में दस से बाहर दिनों का समय लग सकता है।
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