पूंडरी। 2019 के विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा के टिकट के दावेदार रणधीर सिंह गोलन व पूर्व विधायक दिनेश कौशिक का टिकट काटकर कर भाजपा ने एडवोकेट वेदपाल पर दांव खेला तो रणधीर गोलन ने निर्दलीय के रूप में ताल ठोंक दी। इसके बाद पूंडरी के एक पैलेस में अपने समर्थकों के बीच आयोजित जनसभा में जनता के सामने फफक कर रोए।
गोलन के यही आंसू चुनाव में काम कर गए और वे विधायक बन गए। एक तरफ वे 2014 के चुनाव में भाजपा की टिकट व लहर होने के बावजूद हार गए थे। वर्ष 2019 के चुनाव में लोगों ने गोलन के प्रति ऐसी सहानुभूति रही कि उन्हें विधानसभा में पहुंचा कर ही दम लिया।
गौरतलब है कि पूंडरी हलके की जनता पिछले छह चुनावों से किसी पार्टी के टिकट की मोहताज नहीं रही। 1996 से निर्दलीय की ऐसी परंपरा चली, जो 2019 तक जारी रही। हालांकि इस बार पूंडरी से पार्टी के उम्मीदवार के जीतने के ज्यादा आसार नजर आ रहे हैं। पूंडरी हलके में रोड, जाट व ब्राह्मण मत ज़्यादा हैं। रोड वोट एक तरफा रणधीर गोलन की तरफ मुड़ने से गोलन ने कांग्रेस के सतबीर भाणा को हराकर चुनाव जीता।
रणधीर सिंह गोलन को लगभग 41 हजार मत, कांग्रेस के सतबीर भाणा को 28 हजार 184, भाजपा के वेदपाल को 20 हजार 900, निर्दलीय दिनेश कौशिक को लगभग 16 हजार मत मिले। पूंडरी हलके में भाजपा आजतक अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। संवाद
यहां पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. चौधरी ईश्वर सिंह ही ऐसे उम्मीदवार रहे, जो चार बार कांग्रेस पार्टी से चुनाव जीते।