राजौंद। देर रात हुई बरसात से मंडी में पड़े गेहूं के भीग जाने से खरीद एजेंसियों को लाखों रुपये का नुकसान होने का अंदेशा है। मंडी के आढ़तियों ने बताया की अभी तक मंडी 60 हजार कट्टों के लगभग स्टाक पड़ा हुआ है।
बार- बार खरीद एजेंसियों को अवगत करवाने के बावजूद भी गेहूं के स्टाक का उठान नही करवाया गया। इतना ही नही मंडी के आस पास खेतों में पड़े गेहूं के कट्टे कच्चे में ही पड़े हुए हैं।
कट्टों को रखने के लिए लकड़ी की करेटों की व्यवस्था भी मंगलवार सुबह गेहूं के बरसात की चपेट में आने के बावजूद की गई। आढ़तियों ने बताया की बरसात में गेहूं भीग जाने की वजह से अब गेहूं के कट्टों को बरसात के पानी से निकालने के लिए अपने खर्च पर मजदूरों की व्यवस्था करनी पड़ रही है। जिसके लिए वह किसी भी रूप में जिम्मेवार नही हैं। इन लोगों ने बताया की बरसात में भीग जाने से होने वाले गेहूं के नुकसान को खरीद एजेंसियां स्वयं वहन करेंगी।
एक से दो दिन लगेंगे सूखने में
जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक सुरेंद्र सैनी और वेयर हाउस के जिला प्रबंधक यश पाल ने मंडी का दौरा करने के उपरांत बताया की गेहूं के स्टाक को कोई नुकसान नही पहुंचा है। बरसात में भीग जाने से जो नमी गेहूं में पहुंची है, वह एक दो दिन सुखाने से सही हो जाएगी। सैनी ने बताया वह मंडी के व्यापारियों के साथ हैं, किसी भी प्रकार की परेशानी आढ़तियों को नहीं आने दी जाएगी।
इन सबके बावजूद मंडी के कई स्थानों पर मंगलवार सुबह भी गेहूं के कट्टों के चारों ओर पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा था, मजदूर गेहूं को पानी से निकालने में लगे हुए थे। मंडी के जिन हिस्सों में पानी की चपेट में गेहूं आया हुआ था। उसमें से दुर्गंध निकल रही थी। ऐसे में बरसात से भीगे इस गेहूं की आपूर्ति जब लोगों तक पहुंचेगी तो इसे खाने वालों के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।