कैथल। रोडवेज की बस में फ्लाइंग टीम की सूचना के संदर्भ में बनाए एक व्हाट्सएप ग्रुप का खुलासा हुआ है। इसमें शामिल 272 सदस्यों के बीच फ्लाइंग टीम की सूचना अपडेट होती थी। यह खुलासा शुक्रवार को जींद से कैथल आ रही एक रोडवेज की बस की जांच में हुआ। जांच के दौरान एक विद्यार्थी का बस पास फर्जी मिला। जब उसके मोबाइल की जांच की तो उसमें एक व्हाट्सएप ग्रुप मिला, जिसमें फ्लाइंग टीम की जानकारी थी। विभागीय अधिकारियों ने मोबाइल कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल विद्यार्थी को घर जाने दिया गया है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, दोपहर एक से दो बजे के बीच एक बस जींद से कैथल आ रही थी। यह विद्यार्थी बाईपास ही बस में चढ़ा था, लेकिन बस स्टैंड के रास्ते पर कुछ ही दूरी पर टिकट जांच निरीक्षक टीम के सदस्य वहां चेकिंग के तहत मौजूद थे। बस रुकवाकर जब इस विद्यार्थी से टिकट मांगा गया तो उसने पास दिखा दिया। टीम ने जांच की तो पता चला कि उसने बस पास पर फोटो को स्कैन करके अपनी फोटो लगा रखी थी जबकि पास किसी अन्य विद्यार्थी का था। बस पास की जानकारी के दौरान जब विद्यार्थी के फोन की जांच की गई तो एक व्हाट्सएप एप ग्रुप बना हुआ मिला। इसमें जांच टीम की जानकारी दी गई थी। फिलहाल विद्यार्थी से पूछताछ की जा रही है। जांच निरीक्षक टीम का कहना है कि इस विद्यार्थी को किसी अज्ञात ने वाट्सएप ग्रुप में जोड़ा है। उससे पूरी जानकारी ली जा रही है। अभी तक एडमिन की जानकारी नहीं मिली है। इसको लेकर जांच की जा रही है। उसका मोबाइल जब्त कर लिया गया है। इसे जांच के बाद ही दिया जाएगा। फिलहाल विद्यार्थी को जाने दिया गया। फर्जी पास मामले में नियमानुसार जो जुर्माना बना, वह वसूला गया है।
इधर, कैथल रोडवेज के महाप्रबंधक अजय गर्ग ने कहा कि इस मामले को लेकर जानकारी प्राप्त की जा रही है। यदि किसी भी प्रकार से कोई विभाग को नुकसान पहुंचा रहे है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। इसको मामले में टिकट जांच टीम से जानकारी ली जाएगी।
पूर्व में भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
पूर्व में आरटीए कार्यालय के अधिकारियों की गाड़ी का पीछा करने के मामले सामने आ चुके हैं। अब रोडवेज बस में टिकट जांच दल का पीछा करने के लिए व्हाट्एस ग्रुप सामने आया है। मामले की गंभीरता से जांच हो तो बड़ा खुलासा हो सकता है।