संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शुक्रवार को हुई तेज बारिश से कई जगहों पर जलभराव हो गया। नतीजा, वाहनों के पहिये थमने से जगह-जगह जाम लग गया। दोपहर के समय शहर में करीब एक घंटे तक यही हालात रहे। तेज बारिश से लगे जाम की समस्या से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस जाम के बीच यातायात पुलिस कर्मियों ने व्यवस्था बनाई। इस दौरान पूरा दिन यातायात पुलिस कर्मियाें ने पिहोवा चौक पर व्यवस्था बनाई। बारिश के कारण अंबाला रोड, करनाल रोड, पार्क रोड और माता गेट पर जलभराव के कारण जाम लगा।
इसके साथ ही पुराना शहर में जनता मार्केट सहित सब्जी मंडी सहित अन्य जगहों पर जलभराव के कारण काफी देर तक जाम की स्थिति बनी रही।
यातायात थाना प्रभारी रमेश कुमार ने बताया कि तेज बारिश के बाद शहर में जाम की स्थिति बन गई थी। जाम की समस्या से निपटारा करने के लिए पिहोवा चौक सहित अन्य चौक पर यातायात पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई।
इससे पहले गत मंगलवार और बुधवार को भी जिले में तेज बारिश हुई थी। झमाझम बारिश होने से कई इलाकों में जलभराव हो गया था। इस दौरान शहर में कई मार्गों पर भीषण जाम की स्थिति देखने को मिली थी।
शुक्रवार सुबह 11 बजे तक मौसम बिल्कुल साफ था, लेकिन उसके बाद अचानक से बादल हुए और रुक-रुक बारिश हुई, जो करीब तीन घंटे तक जारी रही। मौसम विभाग ने अभी अगले दो दिन तक तेज बारिश की संभावना जताई है।
बारिश के बाद न्यूनतम तापमान पहले से एक डिग्री कम 25.2 डिग्री जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम 31.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहर में कई जगह पर जल जमाव होने से दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, जींद रोड पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज के नीचे भी जलभराव होने से वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
यहां जलभराव से हुईं दिक्कतें
बारिश होने के बाद कबूतर चौक, पुराना बस अड्डा मार्ग, रेलवे गेट, चंदाना गेट, पिहोवा चौक, भगत सिंह चौक, अंबाला रोड, जाखौली अड्डा सहित लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर पानी जमा हो गया। पानी जमा होने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को काफी दिक्कत आई। इसी प्रकार शक्ति नगर, हरी नगर, अर्जुन नगर, हरसौला बस्ती, आंबेडकर नगर, डीएवी कॉलोनी में भी जलभराव हुआ।
विभाग के पूर्वानुमान के तहत अभी अगले दो दिन तक और बारिश हो सकता है। बताया कि इस समय धान की पिछेती फसल को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन आगामी दिनों में तेज बारिश हुई तो धान व सब्जियों की पिछेती फसल को भी नुकसान हो सकता है। -डॉ. रमेश चंद्र वर्मा, मुख्य समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र