संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। भयंकर ठंड के मौसम में जहां ठंडे पानी से हाथ धोने में भी लोगों को कंपकंपी छूट रही है, ऐसे में माईवाला डेरा कलायत में संत दीपक का कपिल सरोवर व डेरा के विकास को लेकर हठयोग जारी है। अल सुबह चार बजे बाबा दीपक जलधारा लेकर तपस्या कर रहे हैं।
गौरतलब है कि गत एक दिसंबर से शुरू हुई जलधारा तपस्या को 19 दिन हो चुके हैं। 19वें दिन बाबा ने 70 मटकों से जलधारा ली। एक मास तक चलने वाले इस हठयोग में आखिरी दिन 108 मटकों से बाबा की जलधारा होगी। बाबा दीपक ने बताया की कलायत में माईवाला डेरा एक ऐसा मंदिर है जो पूरी तरह से जीर्णशीर्ण हो चुका है। कपिल तीर्थ के किनारे स्थापित इस मंदिर में नंदी व शिवलिंग तक खंडित हो चुके हैं।
इसके अलावा मंदिर के नीचे कपिल तीर्थ में ही बने महिला स्नान घाट बुरी तरह से ध्वस्त व गंदगी का ढेर हो चुका है। इस की सफाई के लिए वे स्वयं व सेवक अपने सिर पर तसलों को लेकर सफाई कर रहे हैं। इस और नगर के लोगों व नगरपालिका का भी कोई ध्यान नहीं है। बाबा दीपक ने कहा कि कपिल तीर्थ का भी संभाल न होने के कारण से बहुत बुरा हाल है। परिक्रमा मार्ग टूट चुका है और घाटों का बुरा हाल है।
उनका कहना है कि तीर्थ का पानी गंदा हो चुका है और उसकी निकासी का कोई प्रावधान नहीं है। मंदिर का गंदा पानी तीर्थ में ही आता है। सेवक भंवर सिंह, प्रीत जगदेवा, संदीप, संजीव आदी ने बताया कि माईवाला डेरा एक जागृत धार्मिक स्थान है। बड़ी संख्या में माताएं सायंकाल में यहां भजन कीर्तन करती है। अनदेखी के कारण से इसमें स्थापित दोनों मंदिर गिरने के कगार पर हैं। काफी लंबे समय से यहां कोई संत नहीं था। अब बाबा दीपक ने यहां आकर जिम्मेदारी ली है।
तीर्थ व मंदिरों के उद्धार के लिए जलधारा सुबह चार बजे से ली जाती हैं और कडकड़़ाती ठंड में बाबा केवल एक लंगोट में ही रहते हैं तथा इसके अलावा शरीर पर कोई वस्त्र धारण नहीं करते।