कैथल/गुहला-चीका। घग्गर नदी में जलस्तर बढऩे के बाद नदी किनारे बसे 30 से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा लगातार बना है। पानी बढ़ने के बाद जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। करीब 20 हजार एकड़ फसल जलमग्न है। वहीं रसूलपुर और प्रेमपुरा के बीच शाम को सरस्वती नदी की ड्रेन टूटने से कई किसानोंं के खेतों में जलभराव हो गया है।
घग्गर नदी किनारे बसे गांवों के खेतों में पानी घुसना शुरू होने से ग्रामीण चिंतित हैं। यदि पानी और बढ़ा तो यहां स्थिति बेकाबू हो सकती है। सिंचाई विभाग के अनुसार नदी के जलस्तर के 28 फीट पर जाने के अनुमान है। इस समय भी घग्गर नदी उफान पर है और जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है।
मंगलवार को समाचार लिखे जाने तक नदी में 27.2 फीट तक पानी पहुंच चुका था। खतरे का निशान 23 फीट पर है। घग्गर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 4.2 फीट ऊपर पहुंच चुका है।
खेतों में पानी घुस गया है और 20 हजार एकड़ फसल जलमग्न हो गई। इन वहीं, पानी के कारण चीका क्षेत्र के कई गावों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया है। इन गावों में रहने वाले लोग अब मुख्य सड़क पर पहुंच नहीं पा रहे हैं। गांव कमेहड़ी, बाऊपुर, पपराला, रताखेड़ा घड़ाम, भूंसला, बुढऩपुर सरोला खंबेड़ा दाबा-चाबा गांव के पास चारों तरफ पानी ही पानी है। सडक़ पानी में डूब गई है और आवाजाही भी बंद है। यह रास्ता कैथल को पटियाला से जोड़ता है, वही चीका से रताखड़ा लुकमान वाया समाना पंजाब रस्ते का भी संपर्क टूट गया है।
हालंकि जिले में राहत की बात यह भी रही कि मंगलवार को पूरा दिन बारिश नहीं हुई। जो रास्ता पटियाला की तरफ जाता है, वहां पर बसें बंद कर दी गई हैं ताकि कोई हादसा न हो।