संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। नगर के तालाब इन दिनों उपेक्षा के शिकार बने हुए हैं। कभी ग्रामवासियों के दैनिक जीवन और सांस्कृतिक आयोजनों का अभिन्न हिस्सा रहे ये तालाब अब जलकुंभी, कचरे और गंदगी से पटते जा रहे हैं। गर्मियों में मच्छरों की बढ़ती संख्या और पानी की दुर्गंध ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
नगर पालिका के गठन को चार साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक तालाबों की समुचित सफाई नहीं हो पाई। नगरवासियों का कहना है कि हर बार सफाई की बात पर टेंडर प्रक्रिया का हवाला देकर काम को टाल दिया जाता है। कभी टेंडर लगना बाकी है तो कभी वर्क ऑर्डर आना है, इन्हीं दलीलों में समय निकल जाता है।
कई नागरिकों का मानना है कि जब यहां पंचायत की व्यवस्था थी, तब मनरेगा जैसी योजनाओं से तालाबों की नियमित सफाई होती थी और श्रमिकों को रोजगार भी मिलता था।
अब नगर पालिका की प्रक्रियाएं इतनी जटिल हो गई हैं कि जमीनी स्तर पर काम पिछड़ते जा रहे हैं। जलकुंभी और गंदगी से तालाब बदहाल हैं, मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और लोग स्वास्थ्य संबंधी खतरे महसूस कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि तालाब न सिर्फ नगर की सुंदरता का प्रतीक हैं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के भी महत्वपूर्ण आधार हैं। यदि समय रहते इनकी सुध नहीं ली गई तो मच्छरजनित रोगों और गंदगी से होने वाली बीमारियां बढ़ सकती हैं। नगर के अनेक नागरिकों ने अपील की है कि नगर पालिका तालाबों की सफाई को प्राथमिकता दे और जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि ये ऐतिहासिक जलस्रोत फिर से अपनी पुरानी गरिमा लौट सकें।
नगरपालिका सचिव दीपक कुमार ने बताया कि तालाबों की सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए कार्य योजनाएं तैयार कर ली गई हैं। शीघ्र ही इन पर काम शुरू होगा। सौथा रोड स्थित तालाब का पानी पंप के माध्यम से ड्रेन में डाला जा रहा है। यह प्रक्रिया प्रगति पर है, जिसके बाद सौंदर्यीकरण कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त नगरपालिका कार्यालय के सामने रोड पर स्थित तालाब की भी सफाई की योजना बनाई गई है। प्रयास किए जा रहे हैं कि ये तालाब आकर्षक स्थल के रूप में विकसित हों।