कैथल। कोई घर से पानी ला रहा है कोई दुकान से। इंदिरा गांधी मल्टी
स्पेशलिटी अस्पताल में बुधवार को कुछ इसी तरह का आलम देखने को मिला। पीने
के पानी के लिए मरीज और उनके तिमारदार तरसते रहे। किसी ने अपने घर से केंपर
लाया तो कोई बोतलें भर कर लाते दिखाई दिए।
इस दौरान लोगों के पास खुद पानी लाने और जिला और अस्पताल प्रशासन को कोसने के अलावा कोई चारा नहीं थी।
जिलास्तर
पर इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में नाम के अनुरूप सुविधाएं
मिलना तो दूर पेयजल की फेसलिटी भी नहीं है। मई महीना शुरू हो गया है लेकिन
स्वास्थ्य विभाग को शायद अभी तक गर्मी की आहट महसूस नहीं हो रही। यही कारण
है कि अस्पताल में पेयजल की भारी किल्लत बनी हुई है।
या फिर यूं
कहा जा सकता है कि अस्पताल में मरीज पीने के पानी की वजह से ओर ज्यादा
बीमार हो रहे हैं। मरीजों को बड़े ही गंभीर यत्न करते हुए पेयजल का जुगाड़
करना पड़ रहा है। ‘अमर उजाला’ ने बुधवार को जिला अस्पताल में पेयजल
सुविधाओं का जायजा लिया गया तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। प्रवेश द्वार से
लेकर हर वार्ड में पानी की कमी दुकानों से खरीदी गई बोतलों, मरीजों द्वार
ले जाए जा रहे कैंपरों को देखते हुए साफ नजर आ रही थी। कोई पानी घर से लाए
हुए नजर आया तो कोई पेट्रोल पंप पर लगे वाटर कूलर से तो कोई यहीं पर पुण्य
कमा रहा था। दिन में अपने अलावा अन्य मरीजों के लिए छह से सात कैंपर खरीद
कर वार्ड में ला रहा है।
पेयजल की कहानी- मरीजों की जुबानी
जिला
अस्पताल में प्रवेश द्वार पर ही पानी की बोतल लिए बैठे बचना राम ने कहा कि
यहां पीने का पानी नहीं है, वे बाहर से पानी की बोतल खरीद कर लाए हैं।
महिला वार्ड में ओपीडी में लाइन में लगकर अपने नंबर का इंतजार कर रही
सुनीता ने कहा कि यहां पीने का पानी पीने लायक नहीं है। काफी गर्म है। वे
यहां प्यासे ही बैठे हैं। पोस्ट नेटल वार्ड के पास कूलर से पानी भरते हुए
फूल सामंद्री देवी का कहना है कि यह काफी गर्म पानी है, इसे ही पीना पड़ता
है।
यहीं पर अपने मरीज के साथ आई धर्मपरु से भागोदेवी ने कहा कि वह घर से पानी लेकर आए हैं। '
अपना
छोटा पानी का कैंपर घर से ही भरकर लाते हैं। यहां पानी नहीं है। इसी वार्ड
में फरिबाद की निर्मला ने कहा कि वे बाहर से 40 रुपये में पानी की बोतल
लेकर आए हैं। बालू से आए मेवा राम ने कहा कि वे पानी घर से लेकर आते हैं।
पहली मंजिल पर वार्ड में अपने मरीज की देखभाल कर रहे खुराना रोड निवासी
जसबीर ने कहा कि पानी बाहर से लाते हैं। यहां कोई सुविधा नहीं है।
मरीजों को खुद खरीदने पड़ रहे हैं पानी के कैंपर
चीका
से आए गुरदीप सिंह अपने पिता की अस्पताल में 10 दिन से देखभाल कर रहे हैं।
अस्पताल में लिफ्ट से कैंपर लेकर चढ़ते हुए गुरदीप ने बताया कि वे दिन में
छह से सात कैंपर लेकर आते हैं और वे भी कम पढ़ जाते हैं। अस्पताल मेें तो
पीने लायक पानी है नहीं, तो साथ के मरीजों को भी दे देते हैं। बाहर हर रोज
20 रुपये में कैंफर मिल जाता है। जिसे खुद लेकर आना होता है।
इलाज से ज्यादा पानी पर खर्च
अपने
दाखिल बेटे की देखभाल कर रही प्यौदा निवासी शीला देवी का कहना है कि यहां
कहने को तो इलाज मुफ्त है। लेकिन इलाज से ज्यादा पानी पर खर्च होता है। दिन
में 100 से लेकर 200 रुपये तक पीने के पानी की बोतल पर खर्च होता है। इसी
प्रकार से महिला वार्ड में दयाकौर का कहना है कि पेट्रोल पंप पर लगे वाटर
कूलर से पानी लेकर आना पड़ रहा है।
अस्पताल में वाटर कूलरों की स्थिति
जिला
अस्पताल मेें वाटर कूलरों की स्थिति काफी खराब है। अस्पताल में मुख्य
द्वार के बाहर लगे वाटर कूलर का पानी ही सूख चुका है। दूसरे प्रवेश द्वार
के निकट सीढ़ियों के नीचे लगे वाटर कूलर में पानी तो है कूलिंग नहीं। महिला
वार्ड के निकट के वाटर कूलर की हालत भी खराब है। यहां पानी तो है, लेकिन
कूलिंग नहीं। एक्स-रे रूम के निकट वाटर कूलर में भी कूलिंग नहीं है। पोस्ट
नेटल वार्ड में सीढ़ियों के नीचे दो वाटर कूलर खराब हालत में पड़े हैं।
पहली मंजिल पर तो चालू हालत में वाटर कूलर ही नहीं हैं। यहां लगा वाटर कूलर
पूरी तरह से ठप पड़ा है।
1000 से ज्यादा लोगों आते हैं ओपीडी में
जिला
अस्पताल में हर रोज एक हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। लगभग
इतनी ही संख्या में उनके साथ अटेंडेंट भी होते हैं। लेकिन अस्पताल में पीने
के पानी की सुविधा की ओर कोई ध्यान नहीं हैं। ऐसे में मरीज पानी की कमी के
कारण ओर ज्यादा बीमार हो रहे हैं।
घर से पानी लेकर आता है स्टॉफ
जिला
अस्पताल में लगभग पूरा स्टॉफ अपने घर से पानी लेकर आता है। या फिर कैंपर
मंगवाए जा रहे हैं। अब गर्मियों में स्टॉफ सदस्यों के लिए घर से ज्यादा
पानी ढोना भी एक मुसीबत बन गया है। क्योंकि एक बोतल से पूरा दिन में काम
नहीं चलता। ऐसे में स्टॉफ के लिए भी पानी की सुविधा एक बड़ी समस्या बन गई
है।
तापमान 42 डिग्री सेल्सियस, कब जागेगा विभाग
इस समय
तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंच गया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग
कब जागेगा? इस बारे में शायद ही किसी के पास जवाब हो। इस असुविधा के लिए
कौन जिम्मेवार है? क्या विभाग संबंधित अधिकारी से जवाबतलबी करेगा? यह तो
भविष्य ही बताएगा, लेकिन फिलहाल मरीजों को अगले कई दिनों तक पानी के लिए
यूं ही भटकना पड़ सकता है। क्योंकि वाटर कूलरों की मरम्मत का काम शुरू होता
दिखाई नहीं दे रहा है।