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Kaithal News: कभी थी वरदान, अब प्रदूषण ले रहा जान

Mon, 10 Apr 2023 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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गुहला-चीका। हरियाणा-पंजाब सीमा से लगती घग्गर और सरस्वती नदी कभी क्षेत्रवासियों के लिए वरदान मानी जाती थी, लेकिन इसमें बढ़ते प्रदूषण ने अब लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि नदियों में फैक्ट्रियों के दूषित और केमिकल युक्त पानी से लोगों को स्वास्थ्य पर संकट खड़ा हो गया है। गुहला क्षेत्र में घग्गर व सरस्वती नदी में डाले जा रहे जहरीले पानी के कारण गुहला के विभिन्न गांवों में निरंतर बढ़ रहे कैंसर के मरीजों का मुद्दा हलका विधायक ईश्वर सिंह विधान सभा में भी उठा चुके हैं। उन्होंने बताया था कि घग्गर नदी के जहरीले पानी की वजह से एक ही गांव में कैंसर के आठ मरीजों की मौत हो चुकी है।
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हरियाणा-पंजाब सीमा को बांटते हुए गुजरने वाली घग्गर नदी बरसात के दिनों में बेशक थोड़ा भय पैदा करती है, लेकिन इस दौरान नदी में बहने वाला पानी आसपास की भूमि को रिचार्ज कर पानी का स्तर ऊपर लेकर आता है, जो किसानों के लिए वरदान से कम नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से यह नदी एक दूषित नाले के रूप में परिवर्तित होकर रह गई है। कुछ साल पहले पंजाब, हरियाणा व उत्तराखंड के ऊपरी हिस्सों में लगी फैक्ट्रियों का जहरीला पानी घग्गर नदी में छोड़ा जाने लगा। केमिकल युक्त फैक्ट्रियों का यह पानी घग्गर नदी के आसपास के जमीनी पानी में मिल उसे जहरीला बना रहा है जिसके चलते नदी के आसपास बसे गांवों में काला पीलिया व कैंसर के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही हैं।
दूसरी तरफ हलका गुहला के गांव ककराला, पोलड़, सौथा, पिसौल के पास से गुजरने वाली सरस्वती नदी किसी समय में वरदान साबित होती रही है, लेकिन अब इस नदी में भी फैक्ट्रियों का गंदा पानी डाला जा रहा है। इस नदी का पानी इतना अधिक बदबू मारता है कि इसके पास खड़ा रहना भी कठिन होता है। यह पानी नदी के आसपास बसे गांवों के जमीनी पानी में जहर घोल रहा है, जिससे इन गांवों में पनपने वाली गंभीर बीमारियां लोगों की जिंदगियां लील रही हैं। विदित हो कि गुहला क्षेत्र धान के कटोरे के नाम से जाना जाता है जिसके चलते इस क्षेत्र में राइस मिल उद्योग बड़ी तेजी से पनप रहा है। अकेले गुहला चीका में लगभग 150 राइस मिल हैं, जहां पर हर रोज लाखों गैलन पानी धान को साफ करने के लिए प्रयोग किया जाता है। मिल मालिक इस पानी को जमीन के नीचे दफन कर रहे हैं, जिससे इन राइस मिलों के आसपास बसे गांवों का जमीनी पानी इतना अधिक दूषित हो गया है कि वह पीने लायक ही नहीं रहा। इसी दूषित पानी को पेयजल के रूप में प्रयोग करने से इन गांवों में बड़ी संख्या में चमड़ी के रोग, थायराइड, पीलिया, काला पीलिया और कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं।
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एनजीटी के निर्देशों का किया जा रहा है उल्लंघन-
नदी में जहरीला पानी छोड़कर एनजीटी के निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है। एनजीटी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नदी में दूषित पानी नहीं डाला जा सकता। इसके बावजूद जिला प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
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