संत कबीर दास की जयंती के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी में भाग लेते कवि। विज्ञप्ति
कैथल। गांव पाई में संत गुरु रविदास मंदिर सभागार में सद्भावना साहित्य सदन कैथल की ओर से संत कबीर दास की जयंती के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों ने संत कबीर के विचारों को याद करते हुए सामाजिक सद्भाव, मानवता और नैतिक मूल्यों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवि डॉ. भरतपाल पाई ने समाज को जागरूक रहने का संदेश देते हुए कहा, नींद से जाग जाओ अब, समय है जाग जाने का। वहीं दिनेश बंसल दानिश ने ईश्वर की सर्वव्यापकता पर अपनी रचना प्रस्तुत की।
इसके अलावा गोष्ठी में दिलबाग अकेला, सतप्रकाश, सुरेंद्र कंवल हरियाणवी, संजय पाई, धर्मपाल, डॉ. कुमार अशोक, सतपाल पराशर आनंद, दिनेश बंसल, महेंद्रपाल सारस्वत काण्व द्विवेदी और अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। कविताओं में समाज में बढ़ती चुनौतियों, मानवता, मित्रता, अध्यात्म, प्रकृति और जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बलवान सिंह फौजी ने की और प्रो. अनिल सौदा मुख्यातिथि रहे। सतपाल पराशर आनंद और दिनेश बंसल दानिश विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। महात्मा जयपाल दास का सान्निध्य प्राप्त हुआ और मंच संचालन डॉ. कुमार अशोक ने किया।
बलवान सिंह फौजी ने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए युवाओं से इससे दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि प्रो. अनिल सौदा ने संत कबीर के विचारों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनके संदेश सामाजिक समरसता और भाईचारे की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के अंत में संत कबीर दास को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और साहित्य और समाज के प्रति योगदान देने वाले सभी रचनाकारों का सम्मान किया गया।
संत कबीर दास की जयंती के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी में भाग लेते कवि। विज्ञप्ति