फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: सड़कें, गलियों के साथ गांव का स्टेडियम बदहाल

Tue, 10 Sep 2024 03:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
नरेंद्र राणा
विज्ञापन

पूंडरी। पूंडरी हलके के जनसंख्या व मतदाताओं के हिसाब से बड़े गांवों में शामिल फरल गांव की घोर अनदेखी ग्रामीणों को खटक रही है। विश्व प्रसिद्ध होने के बावजूद फल्गु तीर्थ व पानेश्वर तीर्थ इस हालत में हैं कि गांव की किसी भी गली से गुजरना बड़ा कठिन है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां सड़कें, गलियों के साथ गांव का स्टेडियम बदहाल हालात में है।

यहां करीब आठ हजार मतदाता हैं जो किसी भी प्रत्याशी की हार-जीत में अहम भूमिका निभाते हैं। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सबसे बड़ी व अहम बात तो यह है कि गांव फरल की फल्गु तीर्थ व गांव की लाइफ लाइन कही जाने वाली मुख्य सड़क की किसी जनप्रतिनिधि व प्रशासन ने सुध तक नहीं ली।
विज्ञापन


ग्रामीण विक्की राणा, कंवरपाल, गोकुल, जसमेर सिंह, नवीन, रामगोपाल, यशपाल राणा व शीशपाल सिंह ने बताया महाराणा प्रताप चौक से फल्गु तीर्थ तक आने वाली लगभग आधी सड़क साथ लगते गहरे जोहड़ में समा चुकी है।

भाद्रपद की सोमावती अमावस्या पर गांव में तीर्थ तक पहुंचने के लिए दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस लगी और गंदे पानी व सड़क के गड्ढों से जूझते हुए तीर्थ तक पहुंचे। हैरानी तो इस बात की है कि वर्ष 2018 के बाद से शासन व प्रशासन ने तीर्थ पर आना तक मुनासिब नहीं समझा। जिस कारण फल्गु तीर्थ जल विहीन रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भला हो फल्गु सुधार समिति को कि उन्होंने तीर्थ में स्वच्छ जल भरवाया और तीर्थ के साफ सफाई की। नहीं तो तीर्थ पर श्रद्धालुओं को बिना स्नान की लौटना पड़ रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग आठ हजार मतदाता हैं और पूंडरी हलके से उतरने वाले चुनावों की हार जीत में फरल गांव का अहम रोल होता रहा है।

पूरे पूंडरी हलके में यह बात सर्व विदित है कि जिस पार्टी व उम्मीदवार की तरफ फरल झुक जाए तो उस उम्मीदवार को विजयी करवा कर ही दम लेता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में तीन बस स्टाप हैं, लेकिन मुख्य रू से गुरुद्वारा, शिव मंदिर व मुख्य बस स्टैंड है। इन दोनों ही जगहों पर यात्रियों के बैठने के लिए बस शेल्टर नहीं हैं। इस कारण लोगों को दुकानों व सड़क पर खड़े रहने को विवश होना पड़ रहा है।

मुख्य बस स्टैंड पर वर्षों पुराना बस शेल्टर है जो कि जीर्ण शीर्ण अवस्था में है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करोड़ों रुपये की लागत से अस्पताल का भवन तो तैयार हो चुका है लेकिन अस्पताल अभी भी सामुदायिक भवन में स्थानांतरित है।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के नए भवन के दरवाजे व बिजली के उपकरण शरारती तत्वों द्वारा तोड़ दिए गए हैं, जिसकी आज तक स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों ने सुध नहीं ली। गांव में सीवरेज के नाम पर सभी गलियों को उखाड़ दिया गया है। सीवरेज के नाम पर गांव को एक तरह से उखाड़ दिया गया।

ग्रामीणों के अनुसार पिछले एक वर्ष से अधिक समय से सीवरेज का काम है, जो समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है। ठेकेदार मनमर्जी से सुस्त तरीके से काम कर रहा है। जिस पर कोई रोक टोक नहीं दिखाई दे रही है। गांव के स्टेडियम में पानी खड़ा रहता है। खिलाड़ियों को सड़कों पर तैयारियां करनी पड़ रही है।

पानी निकासी का कोई प्रबंध न होने से लोगों के घरों में घुसता है गंदा पानी व साथ में जहरीले जीव। संवाद

ग्रामीणों का कहना है कि आखिर उनका क्या कसूर है जो उनके ऐतिहासिक गांव की अनदेखी हो रही है। इस चुनाव में यह मुद्दे उठेंगे।
गांव फरल से मेरा विशेष लगाव रहा है। गांव में स्ट्रीट लाइटें लगवाई। इनसे गांव जगमग रहता है। गांव में सभी वर्गों की चौपालों में लाखों रुपये की ग्रांट दी गई। गांव को महाग्राम सीवरेज योजना में शामिल करवाया गया है। -रणधीर गोलन, हलका निवर्तमान विधायक

हलका विधायक ने फरल की अनदेखी कर ग्रामीणों के साथ भेदभाव किया है। गांव में पानी निकासी, गलियां व मुख्य सड़क बदहाल अवस्था में है। गांव में पानी नालियों में कम तो गलियों में ज्यादा दिखाई देता है। विधायक ने गांव फरल की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। सीवरेज के नाम पर घटिया निर्माण सामग्री बरती जा रही है। -सतबीर भाणा, कांग्रेस नेता
विज्ञापन

गया जैसी है मान्यता
मान्यता के अनुसार पिंडदान मोक्ष प्राप्ति का सहज और सरल मार्ग है। मनुष्य पर देव ऋण, गुरु ऋण अौर पितृ ऋण होते हैं। माता-पिता की सेवा करके मरणोपरांत पितृपक्ष में पूर्ण श्रद्धा से श्राद्ध करने पर पितृऋण से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि भगवान राम और सीताजी ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए बिहार के गया में पिंडदान किया था। इसी की तरह फल्गु तीर्थ की भी महत्ता कही जाती है। इसी से यहां पर आसपास के जिलों से भी तमाम लोग तर्पण के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि कभी यहां पर फल्गु नदी बहती थी। अब पांच सरोवर पर पिंडदान करते हैं। गया की तरह इसकी भी ख्याती है। यहां देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। महाभारत कालीन इस तीर्थ के बारे में भी कहा जाता है युधिष्ठिर ने यहां पर पिंडदान किया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें