संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के टीक परिसर में सेमिनार हॉल में उत्तराखंड के मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। ये छात्र-छात्राएं पांच दिवसीय हरियाणा की यात्रा कर रहे हैं। नौ दिसंबर से ये सभी विद्यार्थी कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल व हिसार के विश्वविद्यालयों में जाकर उच्च शिक्षण संस्थानों का अनुभव ले रहे हैं।
इसी कड़ी में 12 अक्तूबर को विद्यार्थियों का एक ग्रुप महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय भी आया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने भारत दर्शन यात्रा पर आए उत्तराखंड के 37 मेधावी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस संवाद का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रेरित करना और उन्हें शिक्षा, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझाना था। प्रो. भारद्वाज ने छात्रों से बात करते हुए कहा आप सभी के पास अपार संभावनाएं हैं और यह भारत दर्शन यात्रा आपके दृष्टिकोण को विस्तृत करने का एक अनमोल अवसर है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा न केवल आपके ज्ञान को बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और विविधताओं को समझने का भी एक महत्वपूर्ण साधन बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कुलपति ने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने जीवन में संयम, मेहनत और समर्पण को अपनाएं और अपने ज्ञान को समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए उपयोग करें।
उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों को भी निभाने की प्रेरणा दी। विद्यार्थियों ने शैक्षिक अनुभवों और यात्रा से जुड़ी जिज्ञासाओं के बारे में कुलपति से सवाल भी किए। यह संवाद सत्र उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं के लिए एक प्रेरणास्रोत साबित हुआ, जो उन्हें शिक्षा, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में अपने कर्तव्यों को समझने का अवसर प्रदान करेगा।
उत्तराखंड सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से राज्य के मेधावी छात्र-छात्राओं का एक ग्रुप हरियाणा में शैक्षणिक भ्रमण के लिए भेजा गया था। ये सभी विद्यार्थी नौ से 13 दिसंबर तक पांच दिवसीय हरियाणा की यात्रा पर हैं।