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134-ए : 2811 में से महज 601 बच्चे परीक्षा देने पहुंचे

Sun, 11 May 2014 11:40 PM IST
कैथल
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कैथल। शिक्षा विभाग की ओर से आरटीई की धारा 134-ए के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए आयोजित टेस्ट में रविवार को 2811 आवेदकों में महज 601 बच्चे ही टेस्ट देने पहुंचे। इस परीक्षा के लिए जिले भर में नौ सेंटर बनाए गए थे। 2210 विद्यार्थी टेस्ट देने नहीं पहुंचे।
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उधर, परीक्षा केन्द्रों के बाहर अभिभावकों ने टेस्ट लेने और शिक्षा विभाग द्वारा इसकी सूचना न देने पर बवाल काटा। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ रोष प्रकट किया। दूसरी ओर जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरा दिन सेंटरों के चक्कर लगाते रहे। सुबह 10 बजे आरंभ हुई परीक्षा में शिक्षा विभाग के अधिकारी बच्चों की राह देखते रहे। सेंटरों में केवल 25 प्रतिशत विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।

सेंटरों का हाल
1. जाट स्कूल में तीन परीक्षा सेंटर बनाए गए थे, जिसमें कक्षा तीसरी, चौथी व पांचवी के विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।
तीसरी में 368 विद्यार्थियों में से केवल 66 विद्यार्थियों ने ही परीक्षा दी।
चौथी में 349 विद्यार्थियों ने में से केवल 81 बच्चे ही पहुंचे ।
पांचवीं में 364 विद्यार्थियों में से केवल 77 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।

2. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छठी व सातवीं कक्षा के लिए दो सेंटर।
छठी में 388 विद्यार्थियों में से केवल 87 ही पहुंचे।
सातवीं में 352 विद्यार्थियों में केवल 92 ने परीक्षा दी।

3. राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यामिक विद्यालय में आठवीं और नौवीं के लिए परीक्षा सेंटर बनाया गया।
आठवीं में 318 विद्यार्थियों में से केवल 78 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।
कक्षा नौवीं में 317 विद्यार्थियों में से केवल 60 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।

4. राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा में दसवीं व और बारहवीं के लिए सेंटर बनाया गया।
दसवीं में 245 विद्यार्थियों में से केवल 44 और बारहवीं में 112 विद्यार्थियों में से केवल 16 ही पहुंचे।


सेंटरों के बाहर अभिभावकों का प्रदर्शन
सेंटरों के बाहर परीक्षा के लिए आए अभिभावकों ने जमकर कर रोष प्रकट किया। अभिभावक श्याम, सिंह, सुरेश कुमार, शमशेर सिंह, सतीश कुमार, संजू, अनिल कुमार, कृष्ण कुमार, जयभगवान, विकास, काला, अनुज कुमार मनीष, सुशील, गौरव, सरोज, सुमन, कविता, गुरमीत, आरती, अनु, सुनैना और मोनिका ने बताया कि सरकार गरीब व्यक्ति का मजाक बना रही है। उनके बच्चे करीब तीन महीने से घरों में खाली बैठे है। अब सरकार ने टेस्ट रख दिया। इसका परिणाम भी निकालने में वह एक महीना ओर लगा देंगे। उन्होंने बताया कि सरकार गरीबी का टेस्ट भी ले रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने टेस्ट की सूचना सही नहीं दी है। जिसके कारण 25 प्रतिशत ही विद्यार्थी ही परीक्षा देने के लिए आए हैं।
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