फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: सब्जियों के दाम गिरे, रसोई का बजट संभला

Sat, 07 Feb 2026 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। सब्जियों के दामों में आई गिरावट से जिले के लोगों, खासकर गृहणियों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ दिनों से उपभोक्ता महंगाई की मार झेल रहे थे, लेकिन अब स्थानीय सब्जी मंडी में दाम कम होने से रसोई का बजट कुछ हद तक संभलता नजर आ रहा है।

आसपास के गांवों से सब्जियों की आवक बढ़ने के चलते मटर, गाजर, आलू, गोभी, टमाटर सहित कई सब्जियों के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, जहां एक ओर आम उपभोक्ता को राहत मिली है, वहीं कम दाम मिलने से किसान मायूस दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन


इन दिनों सब्जी मंडी में सुबह के समय अच्छी-खासी चहल-पहल देखने को मिल रही है। आसपास के गांवों से किसान सीधे मंडी में अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। सप्लाई बढ़ने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिसका असर दामों पर पड़ा है।

वर्तमान में मंडी में आलू 12 से 15 रुपये प्रति किलो, गाजर 20 से 25 रुपये प्रति किलो, मटर 25 से 30 रुपये प्रति किलो और फूल गोभी 15 से 20 रुपये प्रति पीस तक बिक रही है। कुछ सप्ताह पहले यही सब्जियां कहीं अधिक दामों पर मिल रही थीं।

संदीप कुमार ने कहा कि अब सब्जियां सस्ती होने से बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन बनाना आसान हो गया है।

खरीदारी करने आईं रेणु देवी ने बताया कि पिछले महीने सब्जियों के दाम इतने ज्यादा थे कि रोजमर्रा की खरीदारी मुश्किल हो गई थी। अब दाम कम हुए हैं तो घर का बजट कुछ हद तक संतुलित हो गया है।

लोकल आवक से गिरे दाम ः सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि दाम गिरने का मुख्य कारण स्थानीय सब्जियों की आवक बढ़ना है। दुकानदार रमेश कुमार ने बताया कि आसपास के गांवों से सीधे सप्लाई आने पर दाम अपने आप नीचे आ जाते हैं। बाहर के राज्यों से सब्जियां आने पर रेट बढ़ जाते हैं। हालांकि दाम कम होने से बिक्री बढ़ी है, लेकिन मुनाफा सीमित रह गया है। फिर भी ग्राहकों की खुशी से बाजार में रौनक बनी हुई है।
विज्ञापन


किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें

जहां उपभोक्ताओं को राहत मिली है, वहीं किसान कम दाम मिलने से चिंतित हैं। मंडी में सब्जी लेकर पहुंचे किसान सुरेश सिंह ने बताया कि खाद, बीज और मेहनत की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन सब्जियों के दाम घटते जा रहे हैं। मटर और गाजर पर लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। यदि दाम ऐसे ही रहे तो नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने सरकार से मांग की है कि सब्जियों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य या कोई स्थायी व्यवस्था की जाए। हालांकि मौसम में बदलाव या आवक कम होने पर दामों में फिर उछाल आने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें