दो विभागों के आपसी तालमेल की कमी के चलते अमृत योजना के तहत सीवरेज लाइन बिछाने के लिए नई बनाई गई करीब एक किलोमीटर लंबी सड़क तोड़ दी गई। जिसे बने मुश्किल से छह माह हुए थे। अब फिर से सड़क पर उतनी ही राशि खर्च की जाएगी, जितनी राशि से इसका पहले निर्माण किया गया था।
गौरतलब है कि इस समय करनाल-कैथल रोड पर फोर लेनिंग का कार्य चल रहा है। शहर में सर छोटूराम चौक से लेकर करनाल रोड पर गोगा माड़ी तक सड़क को बनाने के बाद सीवरेज लाइन बिछाने के लिए तोड़ दिया गया है। हालांकि सड़क का निर्माण तो कर दिया गया था, लेकिन आसपास की कॉलोनियों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं किया गया था। इस कारण लोगों को दिक्कतें आ रही थी। लोगों की शिकायतों के बाद नगर परिषद द्वारा सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया है, जिस कारण अब इसे फिर से तोड़ दिया गया है।
2.29 करोड़ आएगी लागत- लगभग एक किलोमीटर लंबी इस सड़ पर सीवरेज लाइन बिछाने पर करीब 2.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कॉलोनियों से निकासी के प्रबंध को दो फुट चौड़ी सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी। लाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद इस सड़क का दोबारा निर्माण किया जाएगा। नगर परिषद ने दिसंबर में लाइन से संबंधित कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके बाद सड़क निर्माण पर भी समय लगेगा। इस लाइन को जींद रोड वाली लाइन से जोड़ा जाएगा।
कॉलोनीवासी बोले- सड़क बनाने से पहले ही बिछानी चाहिए थी सीवरेज लाइन
करनाल रोड पर इस क्षेत्र में डिफेंस कॉलोनी, जनकपुरी कॉलोनी और हरसौला बस्ती सहित चार पांच कॉलोनियों लगती हैं। आसपास निवासियों और दुकानदारों मनोज, सुरेश कुमार, दिलबाग सिंह, प्रवीन कुमार, अनूप व अजय ने बताया कि कुछ समय पहले ही सड़क बनी थी, जिसे अब उखाड़ दिया गया है। इससे अच्छा था कि लाइन बिछाने के बाद ही सड़क का निर्माण करवाया जाता। अब फिर लोगों की समस्या बढ़ गई है।
बजट के अनुसार होता है काम का फैसला- नगर परिषद के एमई राजकुमार ने बताया कि जब भी बजट अलॉट होता है, तभी काम शुरू किया जाता है। सड़क की जानकारी नहीं होती यह पुरानी है या नई। लाइन बिछाने का कार्य करने के लिए फिलहाल दो करोड़ 29 लाख रुपये के एस्टिमेट बनाए गया है। उसके बाद लागत के अनुसार एस्टिमेट पास करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नप ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 30 दिसंबर तक का समय निर्धारित किया गया है।
नगर परिषद से नहीं है तालमेल- पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन कुलदीप चंद ने बताया कि जनस्वास्थ्य या अन्य विभाग हो तो विभाग द्वारा पूछा जाता है कि कोई लाइन आदि डालनी है या नहीं। नगर परिषद के साथ ऐसा तालमेल नहीं रहता। उनका पता नहीं होता कि कब कहां कौन सी लाइन डालेंगे। फिलहाल इसके लिए 82 लाख रुपये राशि जमा करवाई जा चुकी है। अन्य बिल भी तैयार किए गए हैं। अगर सड़क बनाने का कार्य तुरंत शुरू कर दें, तो ये अंदेशा रहता है कि कहीं इसे फिर से न उखाड़ दें।