गांव कुराड़ में पराली से हस्तकला बनाने का प्रशिक्षण लेती महिलाएं
कलायत। महिलाओं के उद्यमिता विकास और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में कलायत खंड के कुराड गांव में पराली से हस्तशिल्प एवं कला पर आधारित दो दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रांट थॉर्नटन भारत और जीआईजेड द्वारा आरसेटी कैथल के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। 27 फरवरी से शुरू हुए इस प्रशिक्षण में कुल 40 ग्रामीण महिलाएं भाग ले रही हैं। प्रशिक्षण सत्रों का संचालन छत्तीसगढ़ से आईं मास्टर ट्रेनर एवं पराली कला विशेषज्ञ धनेश्वरी द्वारा किया जा रहा है। वह प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से यह सिखा रही हैं कि कृषि अपशिष्ट मानी जाने वाली पराली को किस प्रकार उच्च मूल्य वाले हस्तशिल्प उत्पादों में बदला जा सकता है। ग्रांट थॉर्नटन भारत के कंसल्टेंट प्रसून साधुखां ने कहा पराली जैसे अपशिष्ट का उपयोग कर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है। इस प्रशिक्षण का आयोजन इस उद्देश्य से किया है कि महिलाएं कृषि अवशेष प्रबंधन से जुड़ें और इससे मूल्य संवर्धन कर सकें। यह प्रशिक्षण जीआईजेड और ग्रांट थॉर्नटन भारत द्वारा हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में संचालित फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य अवशेष आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना और अवशेष के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।