कैथल। नए बस अड्डा पर करीब एक सप्ताह पहले शुरू हुए सरकारी फिलिंग सेंटर पर डीजल डालने वाली तीन में से दो मशीनें खराब हो गई हैं। इस समय केवल एक ही मशीन से कार्य चलाया जा रहा है। ऐसे में बस चालकों को इंतजार करना पड़ रहा है। दरअसल, हरियाणा परिवहन विभाग ने रोडवेज बसों के लिए नया नियम जारी कर अब प्राइवेट फिलिंग स्टेशन से डीजल भरवाने पर रोक लगा दी है।
गौरतलब है कि कोरोना महामारी काल से प्रदेश के सभी बस स्टैंड पर फिलिंग सेंटर बंद कर दिए गए थे। अब इन्हें फिर से शुरू किया गया है। इस सरकारी फिलिंग सेंटर के शुरू होने से पहले निजी पेट्रोल पंप से रोडवेज की बसों में डीजल डलवाया जा रहा था। यह डीजल सरकार को महंगा भी पड़ रहा था। ऐसे में सरकारी फिलिंग सेंटर शुरू किया गया ताकि डीजल किफायती मिले।
असल में पिछले डेढ़ साल से भी ज्यादा समय से बाहर प्राइवेट पेट्रोल पंप संचालकों के साथ अनुबंध कर बसों में डीजल भरवाया जा रहा था लेकिन पंप संचालकों की गड़बड़ी की शिकायतें विभाग के पास पहुंच रही थी। इसी कारण विभाग ने अब इस पर रोक लगाते हुए हरियाणा रोडवेज की बसों में अब डिपो में स्थापित फिलिंग स्टेशनों से ही डीजल भरवाने के निर्देश जारी किए हैं।
जिले में बने फिलिंग सेंटर में उम्मीद के अनुरूप काम भी शुरू हो गया लेकिन फिर यहां की तीन मशीनों में एक-एक कर दो खराब हो गई। अब महज एक मशीन से यहां पर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में यहां से डीजल डलवाने में चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उधर, कैथल रोडवेज महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि नया बस स्टैंड के फिलिंग सेंटर को पिछले सप्ताह ही शुरू किया गया है। लंबे समय से मशीन बंद होने के कारण तकनीकी खामी आई है। इसे ठीक करने के लिए इंजीनियर बुलाए गए हैं। जल्द ही यह ठीक होगी। इसे सोमवार तक सुचारु रूप से शुरू करवा दिया जाएगा।
बस एक लीटर डीजल में चार किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करती है। रूट पर चलने से पहले रोडवेज बसों में डीजल भरवाया जाता है। डिपो में आठ-नौ हजार लीटर से ज्यादा डीजल की खपत होती है। रूट के हिसाब से बसों में डीजल भरा जाता है।