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दो करोड़ की ग्रांट दो गुटों की ‘मैं-मैं’ में फंसी

Wed, 14 May 2014 12:09 AM IST
कैथल
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गुहला-चीका।  सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा विकास कार्यों के लिए नगर पालिका चीका को दी गई दो करोड़ रुपये की राशि अभी तक खर्च किए जाने के इंतजार में है। गुटबाजी के चलते अधिकारी यह राशि खर्च नहीं कर पा रहे हैं। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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एक जून 2013 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अनाज मंडी चीका में आयोजित अपनी गुहला विकास रैली में चीका पालिका क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के लिए दो करोड़ रुपये की ग्रांट जारी की थी। यह ग्रांट पालिका के खाते में आए भी कई महीने बीत गए हैं, लेकिन अभी तक शहर में एक भी पैसा खर्च नहीं हो पाया है।

दोनों गुटों ने बनाई थी विकास कार्य की लिस्ट
नगर पालिका चीका पर काबिज इलाके के वरिष्ठ कांग्रेस नेता ओमप्रकाश गोयल गुट चाहता है कि सारी ग्रांट उनके हिसाब से खर्च हो इसलिए इस गुट ने अपनी प्रधान संतोष देवी के माध्यम से शहर में होने वाले कार्यों की एक लिस्ट बनाकर स्वीकृति के लिए डीसी कैथल को भेजी थी।
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 उधर, गोयल के प्रबल विरोधी एवं गुहला कांग्रेस के आला नेता दिल्लू राम बाजीगर शहर में अपने मुताबिक काम चाहते हैं। इसलिए उन्होंने न सिर्फ अपनी एक अलग लिस्ट बनाई, बल्कि उसे पास भी करवा लाए थे। ऊपर से पास होकर आई बाजीगर की यह लिस्ट जब पालिका पहुंची तो गोयल गुट में खलबली मच गई। पालिका अध्यक्षा संतोष देवी और उपाध्यक्ष ओमप्रकाश गोयल ने खुला ऐलान कर दिया कि वे बाजीगर द्वारा पास करवाई लिस्ट के मुताबिक काम नहीं करवाएंगे। उन्होंने पार्षदों को साथ लेकर डीसी कैथल से भी मुलाकात की थी तथा अपनी लिस्ट को पास करवाने की अपील की थी।

 इस मसले को सुलझाने के लिए डीसी कैथल ने एसडीएम गुहला की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया, जिसमें जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी कैथल, नगर पालिका चीका के सचिव तथा म्यूनिसिपल इंजीनियर के साथ साथ कुछ और अधिकारियों को शामिल किया गया। इस कमेटी ने दोनों लिस्टों में शामिल कार्यों की समीक्षा की तथा उसके बाद एक नई लिस्ट बनाकर डीसी को भेज दी।

जैसे ही आएंगे आदेश, काम शुरू कर देंगे
जब इस संबंध में नगर पालिका सचिव कुलदीप सिंह मलिक से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले को सुलझाने के लिए बनाई गई कमेटी ने कुछ माह पहले अपनी रिपोर्ट डीसी कैथल को भेज दी थी। उन्होंने इस रिपोर्ट की जानकारी देने से तो मना कर दिया, लेकिन इतना जरूर बताया कि इसमें दोनों पक्षों के जरूरी व सांझे कार्यों की पहचान की गई है।
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