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Kaithal News: दो बार कोर्ट का आदेश, डीसी की चार बैठकें... पकड़े नहीं गए कुत्ते

Fri, 16 Jan 2026 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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चीका की मार्केट में घुमते लावारिस कुत्ते।
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नरेंद्र पंडित
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संवाद न्यूज एजेंसी

कैथल। नगर में घूम रहे लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो स्पष्ट आदेश जारी हो चुके हैं। इसके अलावा चार बार उपायुक्त स्तर पर अधिकारियों की बैठकें भी हो चुकी हैं, जिनमें दो बैठकें निवर्तमान डीसी के कार्यकाल में हुईं। इसके बावजूद आज तक शहर की सड़कों से एक भी लावारिस कुत्ता नहीं पकड़ा गया।

इस स्थिति ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कोर्ट के आदेशों की पालना को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है। 14 नवंबर से नगर परिषद टेंडर प्रक्रिया और अभियान शुरू करने के दावों में ही उलझी हुई है। इस दौरान शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता गया।
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आंकड़ों के अनुसार नवंबर से अब तक 591 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल किया है। अकेले इस माह 15 जनवरी तक 141 मामले नागरिक अस्पताल में दर्ज हो चुके हैं। स्थिति यह है कि शहर में छोटे बच्चों पर कुत्ते झपट रहे हैं, लेकिन लगता है उनकी चीखें भी प्रशासनिक अधिकारियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। जिले की बात करें तो एक माह में कुत्ते काटने के एक हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।



आठ सप्ताह में मांगी थी रिपोर्ट, कैथल की रिपोर्ट शून्य

सुप्रीम कोर्ट ने आठ नवंबर को लावारिस कुत्तों और बेसहारा पशुओं को पकड़ने के स्पष्ट आदेश जारी किए थे। न्यायालय ने आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी थी, लेकिन दो माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न कुत्ते पकड़े गए और न ही बेसहारा पशु। नगर परिषद की ओर से अब तक कोई ठोस रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।



बस स्टैंड, नागरिक अस्पताल, रेलवे स्टेशन और प्रमुख बाजारों सहित शहर के लगभग हर हिस्से में लावारिस कुत्तों की भरमार है। न्यायालय ने यह भी साफ किया था कि किसी भी प्रकार की ढिलाई की स्थिति में निकाय और प्रशासनिक अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। इसके बावजूद 35 लाख रुपये का टेंडर होने के बाद भी कुत्ते पकड़ने का अभियान शुरू नहीं हो सका है, जो अधिकारियों की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।



पीएचसी स्तर पर वैक्सीन तक उपलब्ध नहीं



स्वास्थ्य विभाग की स्थिति भी चिंताजनक है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। कुत्ते द्वारा काटे जाने पर ग्रामीणों को शहर के नागरिक अस्पताल या बड़े अस्पतालों की ओर दौड़ना पड़ता है, तब तक वे दर्द और डर में कराहते रहते हैं।



जिले में 22 पीएचसी, चार सीएचसी और छह आरोग्य केंद्र हैं, जिनके अधीन 277 ग्राम पंचायतें आती हैं। नागरिक अस्पताल कैथल में औसतन हर माह 250 मरीज कुत्ते काटने के पहुंच रहे हैं, जबकि पूरे जिले में यह आंकड़ा एक हजार के करीब पहुंच जाता है।
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कुत्ते के काटने पर चार टीके लगवाना अनिवार्य होता है—पहला टीका उसी दिन, दूसरा तीसरे दिन, तीसरा सातवें दिन और अंतिम टीका 28वें दिन लगाया जाता है।



गत वर्ष कुत्ते काटने के मामले

माह
मामले

जनवरी
313

फरवरी
268

मार्च
326

अप्रैल
214

मई
199

जून
180

जुलाई
200

अगस्त
201

सितंबर
180

अक्तूबर 205

नवंबर
215

दिसंबर
235

इस वर्ष (15 जनवरी तक)
141

शेल्टर होम बन रहा : सचिव



नगर परिषद के सचिव पवन शर्मा ने बताया कि चीका में शेल्टर होम बनाने का कार्य चल रहा है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। शेल्टर होम तैयार होने के बाद लावारिस कुत्तों को पकड़कर वहां रखा जाएगा। एजेंसी को टेंडर अलॉट किया जा चुका है और शीघ्र ही अभियान शुरू किया जाएगा।
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