अपनी तीन साल की बिटिया और पांच साल के बेटे को खाने के बाद पन्ना लाल और उसकी पत्नी की हालत देखकर सुबह अस्पताल में मौजूद हर शख्स की आंख रो पड़ी। पन्ना लाल ने काम के दौरान दिन में अपने बच्चों के लिए सेब खरीदे थे लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
सुबह दो पैसे कमाने की चाह में वह अपने मजदूर साथियों और परिवार के साथ राजौंद जा रहा था। सोचा बच्चों को भी साथ ले चलूं, जो सदा के लिए उनसे अलग हो गए।
पन्ना लाल ने बताया कि वह 20 साल से कैथल में यूपी के बदायूं के गांव कुमर से मजदूरी के लिए आ रहा है। सड़क निर्माण में मजदूरी करके वह परिवार का पेट पाल रहा है। शनिवार को भी राजौंद में एक कॉलेज के सामने सड़क पर ही ब्लॉक लगाने के लिए जा रहे थे। सुबह बच्चों ने जिद की तो उन्हें भी साथ ले लिया।
दिन में बच्चों के खाने के लिए सेब भी खरीदे थे लेकिन यह सब हो गया। उसे विश्वास नहीं हो रहा कि उसके बच्चे नहीं रहे। रोते हुए पन्ना लाल यही कह रहा था कि घर जाकर परिजनों को क्या मुंह दिखाऊंगा। मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई।
मौत का ग्रास बने पांच साल के पवन और तीन साल की खुशबू की मां भी हादसे के बाद सुधबुध खो बैठी। दोनों के विलाप से जिला अस्पताल में पहुंचे लोग भी रो पड़े।
मां की गोद में बैठे थे बच्चे
पिकअप चालक ओमप्रकाश नेे बताया कि कोहरे के कारण आगे काफी वाहन थे जिस कारण वह काफी धीमी गति से गाड़ी चला रहा था। इसी बीच पीछे से आकर ट्रैक्टर चालक ने सीधी टक्कर दे मारी। पीछे दोनों बच्चे मां की गोद में बैठे थे। टक्कर लगने के कारण पीछे छिटक गए। दोनों के सिर लगे और ट्रैक्टर के नीचे आ गए।