संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। ढांड थाना क्षेत्र में 18 किलो 250 ग्राम डोडा पोस्त के साथ पकड़े गए पंजाब के दो आरोपियों को एनडीपीएस की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोहित अग्रवाल की अदालत ने पंजाब के जालंधर जिले के गांव तुरना लोहिया निवासी गुरप्रीत सिंह और कपूरथला जिले के गांव ताशपुर निवासी हरजीत सिंह को पहले जेल में बिताई अवधि की सजा सुनाई।
साथ ही दोनों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। दोनों ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार किया था। मामले के अनुसार ढांड थाना पुलिस ने 22 जनवरी 2025 को गुरप्रीत सिंह और हरजीत सिंह के कब्जे से 18 किलो 250 ग्राम डोडा पोस्त बरामद किया था। दोनों के पास नशीला पदार्थ रखने का कोई वैध लाइसेंस या परमिट नहीं था। पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 15(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच पूरी होने के बाद अदालत में चालान पेश किया गया। 5 मई 2025 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
अदालत में स्वीकार किया अपराध
सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने अदालत में अलग-अलग बयान देकर स्वेच्छा से अपराध स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि किसी दबाव या प्रलोभन के बिना अपराध स्वीकार कर रहे हैं। इसके बाद अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया। सजा पर सुनवाई के दौरान दोषियों ने बताया कि वे गरीब परिवारों से हैं और मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इससे पहले उन्हें किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है। ऐसे में उन्होंने सजा में नरमी बरतने की मांग की।
-
व्यावसायिक मात्रा से कम था डोडा पोस्त
अदालत ने फैसले में कहा कि डोडा पोस्त की एक किलोग्राम मात्रा अल्प और 50 किलोग्राम मात्रा व्यावसायिक श्रेणी में आती है। इस मामले में बरामद 18 किलो 250 ग्राम डोडा पोस्त व्यावसायिक मात्रा से कम था। ऐसे मामलों में अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है। अदालत ने कहा कि दोनों का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। लंबे समय तक जेल में रखने से उनके सुधार की संभावना प्रभावित हो सकती है। सजा निर्धारित करते समय अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का भी उल्लेख किया।
जेल में बिताई अवधि को माना सजा
अदालत ने गुरप्रीत सिंह की 22 जनवरी से 12 मार्च 2025 और हरजीत सिंह की 22 जनवरी से 20 फरवरी 2025 तक जेल में बिताई अवधि को ही सजा माना। दोनों पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर दो-दो महीने के कठोर कारावास का आदेश दिया। दोनों दोषियों ने अदालत में कुल 30 हजार रुपये जमा करवा दिए। इसके बाद अदालत ने दोनों को हिरासत से रिहा करने और उनके जमानती मुचलके समाप्त करने के आदेश दिए।