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इलाज नहीं बीमार कर रहा अस्पताल

Tue, 09 Sep 2014 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कैथ्ाल
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इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल में पर्याप्त बेड न होने के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुफ्त इलाज के अलावा दवाओं समेत तमाम तरह की योजनाओं के कारण इस अस्पताल में दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या तो बढ़ गई है लेकिन स्टाफ और जरूरी सुविधाओं में इजाफा न होने के कारण दिक्कतें भी झेलनी पड़ रही हैं। आलम यह है कि एक दिन में सौ बेड के इस अस्पताल में दाखिल मरीजों की संख्या दो सौ तक भी पहुंच जाती है। इस कारण अक्सर एक बेड पर दो मरीज दाखिल करने पड़ते हैं। कई मरीज तो बेड न होने के कारण छुट्टी लेकर ही चले जाते हैं।
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डेढ़ सौ से ऊपर रही है दाखिल मरीजों की संख्या
इस अस्पताल में दाखिल मरीजों की संख्या हमेशा 150 से ऊपर रहती है जबकि यह 100 बेड का अस्पताल है। यहां सुविधाएं भी 100 बेड के हिसाब से ही मिलती हैं। मंगलवार को अस्पताल में 179 मरीज दाखिल थे। इसके अलावा एक सितंबर को 186, दो सितंबर को 186, तीन सितंबर को 193, चार सितंबर को 177, पांच सितंबर को 177, छह सितंबर को 158, आठ सितंबर को 180 मरीज दाखिल थे। विभाग द्वारा 100 स्वीकृत बेड के अलावा 54 अन्य बेड का भी प्रबंध किया हुआ है, बावजूद इसके मरीजों के लिए बिस्तर पूरे नहीं पड़ते। इन बेडों में पोस्टनेटल वार्ड में 28, जरनल वार्ड में 52, पोस्ट आपरेटिव वार्ड में 24, निक्कू में 07, आपातकालीन वार्ड में 14, लेबर रूम में 12, प्राइवेट वार्डों में छह बेडों के अलावा कुछ अन्य वार्डों में बेडों की व्यवस्था की गई है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों के वार्ड में ज्यादा परेशानियां
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार गर्भवती को डिलीवरी से पूर्व और बाद में कई बार बेड न मिलने के कारण परेशानी होती है। कई बार निक्कू वार्ड में बच्चों की संख्या ज्यादा होने पर एक बेड पर दो-दो बच्चे दाखिल रहते हैं। यही हालात सामान्य वार्ड की है, जहां कई बार एक बेड पर दो-दो मरीज दाखिल रहते हैं। सामान्य वार्ड से मिली जानकारी के अनुसार कई मरीज तो बेड न मिलने के कारण छुट्टी लेकर चले जाते हैं। एक बेड पर अलग-अलग बीमारियों के दो मरीज होने के कारण बीमारी के ठीक होने के बजाय फैलने की ज्यादा आशंका बनी रहती है।
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स्टॉफ को भी होती हैं परेशानियां
अस्पताल में 100 बेड के हिसाब से नर्सिंग सहित अन्य स्टॉफ की व्यवस्था है। अधिक मरीज भर्ती होने के कारण स्टाफ को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार बेड न मिलने के कारण स्टॉफ को लोगों की खरी-खोटी भी सुनने को मिलती है। लोग मल्टी स्पेशिएलिटी अस्पताल द्वारा दी जा रही सुविधाओं पर सवाल उठाते हैं।

स्वीकृत बेड की संख्या बढ़े
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में बेड की संख्या के हिसाब से सुविधाएं मिलती हैं। यदि 100 बेड के अस्पताल में अधिकृत तौर पर बेडों की संख्या में इजाफा हो जाता है तो न केवल सुविधाएं बढ़ेंगी बल्कि स्टॉफ की भी अतिरिक्त व्यवस्था हो सकती है।
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