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Kaithal News: अबकी सोमवती-भौमवती अमावस्या का एक साथ मिलेगा लाभ

Sun, 01 Sep 2024 03:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। इस बार भाद्रपद मास में आने वाली अमावस्या पर जनमानस को दो लाभ मिलने वाले हैं। दरअसल, इस बार दो सितंबर के दिन अमावस्या तिथि है। इसकी शुरुआत दो सितंबर सोमवार की सुबह पांच बजकर 21 मिनट पर होगी और समापन अगले दिन मंगलवार यानि 3 सितंबर को लगभग 7 बजकर 25 मिनट पर होगा। इस वजह से भक्तों को अबकी सोमवती-भौमवती अमावस्या का एक साथ लाभ मिलेगा।

यह जानकारी पंडित विशाल शांडिल्य ने दी। उन्होंने बताया कि हिंदू संस्कृति में भाद्रपद मास की अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इसे कुशाग्रहणी अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन पूरे साल में किए जाने वाली पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कामों के अलावा श्राद्ध में उपयोग आने वाली कुश को इकट्ठा किया जाता है। भाद्रपद अमावस्या के कुछ समय पश्चात ही श्राद्ध पक्ष शुरू हो जाता है।
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अमावस्या को श्राद्ध कर्म करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। भाद्रपद अमावस्या को लेकर पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि इस बार भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि 2 सितंबर को है। साथ ही अमावस्या तिथि को कुछ ऐसा होने जा रहा है जिससे भक्तों को दोगुना फायदा हो सकता है। सोमवार को सोमवती अमावस्या के दिन तो आप व्रत, दान-स्नान आदि से तो लाभ पाएंगे ही साथ ही मंगलवार का दिन भी आपके लिए बेहद खास होगा। भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि इस बार दो सितंबर के दिन रहेगी।

अमावस्या तिथि की शुरुआत दो सितंबर की सुबह पांच बजकर 21 मिनट पर होगी और अमावस्या तिथि का समापन अगले दिन यानि 3 सितंबर को लगभग 7 बजकर 25 मिनट पर होगा। 2 सितंबर के दिन सूर्योदय 5 बजकर 59 मिनट पर होगा यानि उदया तिथि के चलते भाद्रपद अमावस्या तिथि 2 तारीख को होगी। वहीं 3 सितंबर के दिन सूर्योदय 6 बजे होगा और भाद्रपद अमावस्या तिथि 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। अर्थात, उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, मंगलवार 3 सितंबर के दिन भी अमावस्या तिथि रहेगी।

उन्होंने बताया कि मंगलवार को जब अमावस्या तिथि रहती है तो इसे भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार सोमवती अमावस्या के साथ ही भौम अमावस्या का योग भी है।

सोमवती अमावस्या के दिन 2 सितंबर को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं तो वैवाहिक जीवन में सुख समृद्धि प्राप्त होगी। इसके साथ ही इस दिन आप पितरों के निमित्त तर्पण कर सकते हैं। ऐसा करना आपको पितृ दोष से मुक्ति दिलाएगा।

सोमवती अमावस्या के दिन सफेद चीजों जैसे- दूध, सफेद वस्त्र, चावल आदि का दान करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में चंद्रमा भी मजबूत होता है। तीन सितंबर को भौमवती अमावस्या को हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन की सभी विघ्न बाधाएं दूर हो सकती है।

विद्यार्थियों को भौमवती अमावस्या के दिन हनुमान जी की पूजा से शिक्षा के क्षेत्र में लाभ प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही स्नान-दान करने से इस दिन भी आपको लाभ प्राप्त होगा। इस दिन लाल रंग का चोला हनुमान जी को अर्पित करने से मानसिक समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
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सोमवती अमावस्या पर करें तीन दान



सोमवती अमावस्या पर तीन दान करने की परंपरा है। इस दिन देव दान, पितृ दान और ग्रह दान का विधान है। इसका तात्पर्य यह है कि आप देव, पितर और ग्रह के लिए दान करें। सोमवती अमावस्या के दिन देवों को तृप्त करने के लिए वस्त्रों का दान कर सकते हैं। ये वस्त्र सिले हुए होने चाहिए। पितरों को तृप्त करने के लिए अन्न का दान करना चाहिए। अन्न का दान पितरों को तृप्त करता है। सोमवती अमावस्या का दिन सोम यानी चंद्र देव से संबंधित है। इस दिन चांदी, सफेद वस्त्र, दही, खीर, मिश्री, अक्षत, चावल, मोती आदि का दान कर सकते हैं।
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