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Kaithal News: अबकी घटी धान की पैदावार, किसान बोले- खर्च कहां से निकलेगा

Sun, 02 Nov 2025 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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अनाज मंडी में पड़ी धान की ढेरिया
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संवाद न्यूज एजेंसी

कैथल। इस बार बारिश ने जिले के किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। धान की पैदावार घटने और बाजार में भाव गिरने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई

किसानों के अनुसार अबकी बार न तो पैदावार उम्मीद के मुताबिक हुई और न ही मंडियों में दाम ठीक मिल रहे हैं।

जिले के अधिकांश किसान अपनी धान की फसल को औने-पौने भाव में बेचने को मजबूर हैं।

कैथल जिले में इस बार लगभग साढ़े तीन लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में धान की रोपाई की गई थी। किसानों ने बताया कि करीब 50 प्रतिशत रकबे में पीआर, 1121, 1509, 1718 और 1885 जैसी किस्मों की खेती की गई, जबकि कुछ किसानों ने सरबती और बासमती की फसल भी उगाई थी। पिछले दो सालों से 1121 किस्म का भाव 4500 से 4600 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा था, लेकिन इस बार मंडियों में यह 3800 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक ही बिक रही है।
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इसी तरह 1509 किस्म का पिछले साल 3300 से 3400 रुपये का भाव था, जो अब 2900 से 3100 रुपये रह गया है। निजी एजेंसियां भी धान की खरीद कम दामों पर कर रही हैं। किसानों ने कहा कि हर साल खाद, बीज और दवाइयों की कीमतें बढ़ जाती हैं, परंतु फसल के दाम घट जाते हैं। सरकार यदि मूल्य निर्धारण की ठोस व्यवस्था नहीं करती, तो खेती घाटे का सौदा बन जाएगी।

भाव कम मिलने से नुकसान ः नुकसानधान के दाम कम मिलने से जमीन ठेके पर लेकर काश्त करने वाले किसानों व ठेकेदारों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने इस बार क्षेत्र में 65 से 75 हजार रुपये प्रति एकड़ तक जमीन ठेके पर ली हुई है। ऐसे में इन ठेकेदारों को ठेके की राशि के साथ-साथ लागत मूल्य भी वसूल करना होता है, लेकिन धान के भाव कम मिलने से उन्हें भारी

नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि एक एकड़ में 40 से 45 हजार रुपये की धान की फसल निकली है।

दुखड़ा ः अबकी बार ठेका भी पूरा नहीं हुआ

ठेका लेकर खेती करने वाले किसान राजेंद्र और राजेश ने बताया कि बारिश से धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। पैदावार घटने के कारण न तो ठेका पूरा हुआ और न ही खर्च निकल सका। किसानों ने कहा कि हर साल फसल के दामों में उतार-चढ़ाव रहता है, इसलिए सरकार को समर्थन मूल्य तय करना चाहिए, ताकि मेहनतकश किसान को सुरक्षा मिल सके।
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इस बार बारिश के कारण धान की पैदावार पर असर पड़ा है। पिछले साल के मुकाबले इस बार उत्पादन में कमी दर्ज की गई है। इसी वजह से किसानों को नुकसान की बात कही जा रही है। -सतीश नारा, एसडीओ, कृषि विभाग
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