गुहला-चीका। पिछले वर्ष जुलाई माह में घग्गर नदी में आई बाढ़ के कारण जहां कई जगहों से रिंग बांध टूट गया था। वहीं, इस पानी ने गुहला क्षेत्र के बचाव के लिए बनाई गई टो वॉल को भी ध्वस्त कर दिया था। टो वॉल टूटने के बाद लाखों क्यूसेक पानी तेजी से गुहला क्षेत्र में फैल गया था। इससे क्षेत्र में भारी तबाही हुई थी। टो वॉल को टूटे एक साल का समय बीत चुका है।
अब मानसून दोबारा आने को है, लेकिन सरस्वती डिविजन पिछले एक साल में टूटी हुई टो वॉल को पक्का करने की बजाए सिर्फ योजनाएं बनाने में ही उलझा रहा, जबकि इसके लिए तीन करोड़ का बजट भी पास हो चुका है। अब जबकि मानसून करीब है तो विभाग मिट्टी के थैले लगा पानी से बचाव के प्रबंध कर रहा है, लेकिन ये प्रयास कितने कारगर हो पाएंगे, यह तो समय ही बताएगा।
यदि इस बार भी घग्गर नदी में पिछले वर्ष की तरह भारी मात्रा में पानी आया तो मिट्टी के थैलों से पाटे गए टो वॉल के हिस्से शायद ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे। ऐसे में एकबार फिर क्षेत्रवासियों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ सकती है।
घग्गर नदी के पास बसे और पिछले साल बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रकोप झेलने वाले गांव टटियाना निवासी गुरजंट सिंह, विक्रम सिंह, हरजिंद्र सिंह, बिंद्र टटियाना, जसपाल पाली, केवल सदरेहड़ी ने बताया कि गुहला क्षेत्र में बाढ़ के पानी ने न केवल लाखों एकड़ फसल बर्बाद की थी, बल्कि चार लोगों की जान लेने के साथ दर्जनों पशु भी बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। लोगों ने कहा कि नहरी विभाग व सरस्वती डिविजन हर साल सिर्फ कागजों में ही बाढ़ बचाव के काम करते हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है।
ग्रामीणों ने बताया कि टो वॉल को टूटे एक साल गुजर चुका है, लेकिन विभाग इसे पक्का नहीं कर सका और अब बरसात का मौसम सिर पर आया तो मिट्टी के थैलों से कटाव को मजबूत करने की खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि इस बार भी पिछले साल की तरह ही घग्गर नदी में पानी आया तो तबाही कहीं ज्यादा होगी और इसके लिए विभाग और सरकार जिम्मेदार होगी। संवाद
पहले जो टो वॉल बनाई गई थी, उसके ऊपरी हिस्सों में सरिया नहीं डाला गया था। इसके चलते वह पानी का दबाव नहीं झेल पाई। घग्गर नदी में सवा लाख क्यूसेक पानी आने के बाद भी टो वॉल न टूटे। इसको लेकर विभाग सरकारी इंस्टीट्यूट से वॉल का डिजाइन बनवा रहा है। टो वॉल के निर्माण के लिए तीन करोड़ रुपये का बजट आ चुका है और अलग एक दो सप्ताह में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यदि जुलाई माह में ज्यादा बरसात नहीं हुई तो टो वॉल का निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले वॉल को मजबूत करने के लिए कार्य कराए जा रहे हैं। -दिग्विजय शर्मा, एक्सईएन सरस्वती डिविजन नंबर-3 कुरुक्षेत्र।