संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एक जुलाई से लागू किए गए नए कानून और उनकी धाराओं के तहत काफी बदलाव हुए है। इनके तहत अब पुलिस की शक्तियां बढ़ गई हैं और रिमांड की अवधि को भी बढ़ाया गया है।
ऐसे में अधिवक्ताओं को भी नए कानून समझने में अभी अधिक समय लगेगा। नए कानून और उनकी शक्तियों को जिला बार एसोसिएशन के सदस्यों के विचार जाने गए। इन सदस्यों का कहना है कि अपराध के नए कानूनों में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में कठोर सजा का प्रावधान है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है अब कम से कम महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में तो कमी आएगी।
अभ्यास में काफी मेहनत करनी होगी
नए कानून और उनकी धाराओं के बदलने के बाद अधिवक्ताओं को अपने अभ्यास में काफी मेहनत करनी होगी। अभी तक तो जानकारी मिली है कि नए कानूनों में पुलिस की शक्तियों को बढ़ाया गया है। इसके साथ ही हथकड़ी लगाने के प्रावधान था कि छोटे अपराधों में हथकड़ी किसी को नहीं लगाई जाएगी, लेकिन नए कानूनों में हथकड़ी लगाने के प्रावधान को भी बदला गया है।
- जितेंद्र शर्मा, अधिवक्ता, कैथल।
सबूत होना हर अपराध में जरूरी
नए कानून और उनकी धाराओं के बदले जाने के बाद अब हर अपराध में पुलिस की जहां शक्तियां बढ़ाई गई हैं। वहीं, फॉरेंसिंक के सबूत होना हर अपराध में जरूरी किया गया है। अब अदालत में हर अपराध में फॉरेंसिंक की रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। इससे कहीं न कहीं अपराधी को अदालत में थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। यदि वह दोषी होगा तो ही उसे सजा मिलेगी। नहीं तो उसके बरी होने के भी अधिक मौके होंगे।
- गौरव शर्मा, अधिवक्ता, कैथल।
महिला विरुद्ध अपराध में सजा बढ़ाई
पहले अक्सर देखने को मिलता था कि महिला विरुद्ध अपराध में भी अपराधी बच जाता था, लेकिन महिलाओं के खिलाफ हाेने वाले अपराध में सजा बढ़ाई गई है। इससे कहीं न कहीं अब महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाला व्यक्ति एक बार सोच विचार जरूर करेगा कि वह ऐसा अपराध अब करे या नहीं।
- विशाल डिगानी, अधिवक्ता, कैथल।