कैथल। मार्च माह में आई बारिश के कारण फसल खराबे के लिए जिले में किसानों ने दो लाख से अधिक एकड़ में फसल के खराबे की सूचना अपलोड की है। इस सूचना को अब पटवारी खेतों में जाकर सत्यापित कर रहे हैं। पटवारियों को खेतों में कई जगह कुछ ओर ही मिल रहा है। कई किसानों ने जिस खेत में गेहूं की फसल में नुकसान बताया है, उस खेत में गेहूं की फसल ही नहीं है। इसके अलावा एक पटवारी के पास पांच से छह हजार एकड़ गेहूं में सत्यापन करना है।
पटवारियों से मिली जानकारी के अनुसार, किसानों ने कई ऐसी जगह के लिए भी मुआवजा मांगा है, जहां गेहूं की फसल ही नहीं है। इनमें कई जगह पेट्रोल पंप, स्कूल, सत्संग भवन, निजी स्कूल, धार्मिक स्थल, खाद के गड्ढों वाली जगहों के लिए भी गेहूं की फसल में नुकसान बताया जा रहा है। जब मौके पर जाकर देखते हैं, तब यह सच्चाई सामने आती है। इसके अलावा कई किसानों ने गन्ने की फसल, हरे चारे की फसल वाले खेत में गेहूं की फसल बता नुकसान बताया है। इन सभी बातों का सत्यवान प्रति एकड़ में जाकर करना पड़ रहा है। कई जगह फसल कट गई है, ऐसे में पटवारियों के लिए नुकसान का आकलन करना भी मुश्किल है।
पटवारी एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलबाग सिंह ने कहा कि पटवारियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। इसके संबंध में डीसी से भी मिले थे। न क्षतिपूर्ति सहायक मिले, न ही अब सीएससी संचालक आते। पटवारी खुद ही सत्यापन का कार्य कर रहे हैं। तहसीलदार सुदेश मेहरा ने कहा कि पटवारियों को फील्ड में कुछ दिक्कतें आ रही हैं, जो उन्होंने बताई हैं। फिर भी सरकार के निर्देशानुसार सत्यापन का काम किया जा रहा है। जल्द से जल्द पटवारी इस काम को पूरा कर देंगे। सत्यापन कर सरकार को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। संवाद
जिले में 142 पदों पर 80 पटवारी जांच जल्द पूरी करने का दबाव
पटवारियों के अनुसार, जिले में 142 पदों के मुकाबले 80 पदों पर ही पटवारी कार्यरत हैं। इनमें से भी सारे फील्ड में नहीं हैं। एक पटवारी के पास चार से पांच गांव हैं। ऐसे में एक-एक एकड़ पर जाकर सत्यापन करना एक मुश्किल कार्य है। फिर भी पटवारी छुट्टी के दिन भी काम कराके जैसे-तैसे इस काम को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।
दो लाख में से आधा हुआ सर्वे, ऑनलाइन करीब दस हजार एकड़
जिला राजस्व अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में दो लाख एकड़ से अधिक में खराबे के लिए किसानों ने पोर्टल पर मुआवजे के लिए आवेदन किया है। इसमें से पटवारियों ने मैन्यूअल करीब 50 प्रतिशत व पोर्टल पर ऑनलाइन दस हजार एकड़ ही सत्यापित सत्यापित हुई है। पटवारी लगातार इस काम में जुटे हुए हैं।