साक्षरता परीक्षा में भाग लेते शिक्षार्थी। नोडल अधिकारी
कैथल। पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती, इस बात को 80 वर्षीय दर्शना देवी ने साबित कर दिखाया। गुहला निवासी दर्शना देवी ने रविवार को उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत आयोजित साक्षरता परीक्षा में उत्साह के साथ भाग लिया। परीक्षा देकर उन्होंने उन लोगों के लिए मिसाल पेश की जो किसी कारणवश पढ़ाई पूरी नहीं कर सके।
उनके अलावा कलायत की 79 वर्षीय सरस्वती ने भी यह परीक्षा दी और दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनीं। सभी छह खंडों गुहला, कैथल, राजौंद, कलायत, पूंडरी और सीवन में आयोजित परीक्षा में 1008 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। इनमें 628 महिलाएं और 380 पुरुष शामिल रहे।
उल्लास कार्यक्रम के तहत पहले सर्वे करवाकर 15 वर्ष और इससे अधिक आयु के निरक्षर लोगों की पहचान की गई। इसके बाद स्वयंसेवकों की मदद से उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाया गया। स्वयंसेवकों में शिक्षार्थियों के परिवार के सदस्य आसपास के बच्चे और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।
साक्षरता परीक्षा में भाग लेते शिक्षार्थी। नोडल अधिकारी
साक्षरता परीक्षा में भाग लेते शिक्षार्थी। नोडल अधिकारी
साक्षरता परीक्षा में भाग लेते शिक्षार्थी। नोडल अधिकारी
साक्षरता परीक्षा में भाग लेते शिक्षार्थी। नोडल अधिकारी
साक्षरता परीक्षा में भाग लेते शिक्षार्थी। नोडल अधिकारी